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मिसाल: हरियाणा का यह गांव है अधिकारियों की खान, दे चुका 100 से अधिक अधिकारी

Wed, 21 Dec 2022 09:46 AM IST
भूपेंद्र सिंह प्रदीप शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौल (हरियाणा)

सार

चार आईएएस के अलावा गांव से प्रोफेसर, न्यायाधीश, कॉलेज कैडर के प्राचार्य, कर्नल, वैज्ञानिक निकल चुके हैं। गांव की बेटी याशिक फरीदाबाद की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हैं। राजनीति की बात करें तो गांव ने एक विधायक भी दिया है। 
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राजकीय विद्यालय कांवी, दूसरी और गांव में स्थित मंदिर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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दक्षिण हरियाणा में जिला महेंद्रगढ़ के गांव कांवी की बालू मिट्टी में सैकड़ों अधिकारी पैदा हुए हैं। यह गांव देश एवं प्रदेश को 100 से अधिक प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारी दे चुका है। गांव के बेटे-बेटियां और बहुएं आईएएस, मजिस्ट्रेट, कर्नल, डॉक्टर, इंजीनियर, प्राचार्य, पीएचडी, वैज्ञानिक, एडवोकेट, जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में देश एवं प्रदेश में सेवाएं दे रहे हैं। लगभग एक दशक से राजनीति में भी पीछे नहीं है। 

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नांगल चौधरी के विधायक राव अभय सिंह गांव के पहले एचसीएस रहे और अब दो योजनाओं से लगातार विधायक हैं। रोहतक के वर्तमान उपायुक्त यशपाल यादव भी इसी गांव से हैं। गांव के विनय सिंह यादव चंडीगढ़ गृहमंत्रालय में सचिव हैं और उनकी बेटी देवयानी आईएएस हैं। उन्हें गुजरात कैडर मिला हुआ है।

गांव की बेटी याशिका फरीदाबाद की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हैं। जिले के शिक्षा अधिकारी सुनील दत्त भी कांवी निवासी हैं। गांव के अंदर लगभग 250 से अधिक शिक्षक एवं 60-70 जवान सेना में तैनात हैं। एडवोकेट सुुभाष यादव के अनुसार है कि गांव 100 प्रतिशत साक्षर है।  (संवाद)
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मास्टर पन्ना लाल।
मास्टर पन्ना लाल ने गांव में जगाई थी शिक्षा की अलख 
गांव की सरपंच उर्मिला यादव ने बताया कि गांव पहले से ही शिक्षा के क्षेत्र में आगे रहा है। देश की आजादी के बाद गांव में स्कूल नहीं था, लेकिन पंडित महादेव प्रसाद नीम के पेड़ के नीचे बच्चों को बैठाकर पढ़ाते थे। गांव में वह एकमात्र अध्यापक थे। उनके बाद 1952 में मास्टर पन्ना लाल यहां बतौर जेबीटी अध्यापक आए थे। उस समय भी गांव में स्कूल नहीं होता था। गांव के इस अध्यापक ने तत्कालीन सरपंच राव सरदार सिंह के साथ मिलकर गांव से अनाज के रूप में चंदा एकत्रित किया। उस अनाज को बेचकर गांव में एक-दो कमरे का छोटा स्कूल बनाया। इसके बाद अध्यापक ने अपना मकान भी गांव में ही बना लिया। सेेवानिवृत्त होने तक गांव के स्कूल में ही पढ़ाया। अध्यापक घर-घर जाकर परिजनों को बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करते थे जिसका परिणाम यह हुआ है कि यह गांव 100 प्रतिशत साक्षर है और गांव के आईएएस, विधायक, प्राचार्य, कर्नल उनके पढ़ाए हुए हैं। मास्टर पन्ना लाल ने इस गांव में सही मायने में शिक्षा की अलख जगाई थी। अब उनकी याद में पांच सितंबर को गांव में बड़ा आयोजन कर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

पद का नाम   - संख्या

  • आईएएस - 04
  • न्यायाधीश - 03
  • कर्नल - 5
  • जिला शिक्षा अधिकारी -02
  • डीएसपी - 03
  • बैंक अधिकारी - 06
  • कृषि अधिकारी - 05
  • आईआईटी - 03
  • स्कूल प्राचार्य  - 01
  • कॉलेज प्राचार्य - 01
  • लेक्चरर - 06
  • एमबीबीएस - 20 ( 17 ऑन ट्रेनिंग)
  • ईडी सुपरिंटेंडेंट - 01
  • पीएचडी - 6
  • वैज्ञानिक -02
  • अध्यापक - 250

नोट- इनमें कुछ सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल हैं।

गांव की कुल आबादी - 5000
कुल मतदाता - 3000
साक्षर - 100 प्रतिशत

बच्चे को आगे बढ़ाने में परिवार एवं शिक्षक का अहम रोल होता है। उनका आशीर्वाद बना रहे तो बच्चा आगे बढ़ जाता है। हमारे गांव में मेरे चाचा अभय सिंह यादव पहले एचसीएस रहे हैं। उनको देखकर हमें भी लगा कि हम भी ऐसा कर सकते हैं। उनका मार्गदर्शन भी हमारे लिए बना रहा। गांव तरक्की कर रहा है, यह हमारे लिए गर्व की बात है। - यशपाल यादव, डीसी, रोहतक

पढ़ाई के मामले में हमारा गांव जिले में अव्वल है। वर्तमान में गांव 100 प्रतिशत साक्षर है। गांव के पहले पढ़े-लिखे पंडित मातादीन थे और पहली बेटी चंपा पुत्री रामस्वरूप थीं। गांव में शिक्षा की अलख गांव चंदपुरा से आए मास्टर पन्ना लाल ने 1959 में जगाई थी। गांव ने 100 से अधिक प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारी दिए हैं। आगे भी हम शिक्षा सुधार के लिए युवाओं को मोटिवेट करेंगे। - उर्मिला यादव, सरपंच, गांव कांवी

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गांव में मास्टर पन्ना लाल ने शिक्षा की अलख जगाई थी, गांव से निकले सभी अधिकारी उनसे पढ़े हुए हैं। कई अधिकारी सेवानिवृत्त भी हो गए हैं। वर्तमान में हमारे गांव में कई अधिकारी देश एवं प्रदेश में सेवा कर रहे हैं। गांव कांवी वास्तव में ही अधिकारियों की खान है। - सुभाष यादव, एडवोकेट

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