नारनौल। बाल विवाह से जहां एक ओर पति और पत्नी का शारीरिक विकास नहीं हो पाता है, वहीं उनके होने वाले बच्चों की भी ठीक से परवरिश नहीं हो पाती है। इसलिए बाल विवाह के बारे कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरूक करें। यह निर्देश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव व मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी शैलजा गुप्ता ने वीरवार को न्यायिक परिसर के एडीआर सेंटर में बचपन बचाओ आंदोलन के राज्य समन्वय पुनीत शर्मा के साथ बाल विवाह से संबंधित हुई वीडियो कांफ्रेंस के बाद अधिकारियों को दिए। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी शैलजा गुप्ता ने कहा कि छोटी उम्र में शादी करने के कारण वह ठीक से अपने परिवार की जिम्मेदारियों को नहीं निभा पाते हैं। सरकार ने शादी के लिए लड़की आयु 18 वर्ष व लड़के की आयु 21 वर्ष निर्धारित की हुई है। कहा कि विशेषकर शादी के सीजन में बाल विवाह को रोकने के लिए जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित कर बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करें ताकि बाल विवाह को रोका जा सके। कहा कि अगर शादी के समय लड़की उम्र 18 वर्ष व लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम है तो परिवार के सदस्यों को कम उम्र में शादी करने पर 2 साल की सजा व एक लाख जुर्माना दोनों हो सकते हैं। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. रमेश चंद्र आर्य, जिला कार्यक्रम अधिकारी संगीता यादव, बाल संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी सरिता शर्मा, बाल संरक्षण अधिकारी संतोष कुमार, शिक्षा विभाग से रमेश सोनी आदि मौजूद रहे।