सतनाली। नाबार्ड के फंड से जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा सतनाली खंड के 25 गांवों एवं 9 ढाणियों में पीने के पानी के लिए तैयार किए गए प्रोजेक्ट में आ रही तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए शनिवार को सतनाली खंड में बैठक का आयोजन किया गया। विकास एवं निगरानी समिति सदस्य संदीप मालड़ा की ओर से एक दर्जन गांवों के सरपंचों व ग्राम पंचायत सदस्यों तथा जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की। संदीप मालड़ा ने बताया कि नाबार्ड के फंड से पीने के पानी के लिए जो प्रोजेक्ट का काम चल रहा है, उसमें विभिन्न प्रकार की कमियों के बारे सरपंचों से शिकायत मिल रही थी। शिकायतों के समाधान एवं सुधार के लिए ये बैठक की गई है। बहुत से गांवों में तो लाइन कम बिछाई गई है तथा कुछ गांवों में गलियों को अव्यवस्थित तरीके से उखाड़ा गया पर उसकी मरम्मत ठीक से नहीं की गई। जिन गांवों में लाइन कम बिछाई गई है वहां सभी लोगों को पीने के पानी की सुविधा नहीं मिल पाएगी। उदाहरण के लिए गांव डालनवास में जहां 4465 मीटर लाइन बिछाई जानी थी वहां 1800 मीटर ही लाइन बिछाई गई है। ऐसे ही गांव-गांव पथरवा में 2784 मीटर की जगह सिर्फ 700 मीटर ही लाइन बिछाई गई है। इसी प्रकार गांव नंगला में 2500 मीटर की जगह सिर्फ 600 मीटर ही लाइन बिछाई गई है। गांव डालनवास के सरपंच प्रतिनिधि ओमबीर ने बताया कि गांव की गलियों को बुरी तरह से उखाड़ा गया है तथा उबड-खाबड़ छोड़कर ही ठेकेदार अपना सामान ले गया।
बैठक के दौरान सरपंचों ने बताई स्थिति
बैठक के दौरान ग्राम पंचायत के सरपंचों का कहना था कि कुछ गांवों में नक्शे के हिसाब से लाइनें नहीं बिछाई जा रही हैं। जबकि इस योजना के तहत सभी लाइनें नई बिछाई जानी थी। कुछ गांवों में दशकों पुरानी दबी हुई पाइपलाइन में ही कनेक्शन जोड़ा जा रहा है, अधिक प्रेशर की वजह से फट रही हैं। सरपंचों का कहना था कि कुछ गांवों में तय दूरी से भी आधी लाइनें ही बिछाई गई हैं। दो-तीन गांवों में तो अभी भी यह पाइप बाहर पड़े हैं।