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सच्ची मित्रता में स्वार्थ का कोई स्थान नहीं : आचार्य

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फोटो नंबर-10भागवत कथा के समापन पर हवन में पूर्ण आहुति डालते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
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नारनौल। दुलोठ जाट गांव में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार को हवन और प्रसाद वितरण के साथ समापन हुआ। मनीष शास्त्री व यश शास्त्री ने मुख्य यजमानों से विधि-विधान से देव पूजन करवाकर हवन में आहुति दिलवाई। कथा व्यास आचार्य बजरंग शास्त्री ने कहा कि हवन धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णता का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से अहंकार से दूर रहकर संतों, बुजुर्गों और माता-पिता का सम्मान करने की अपील की। श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची मित्रता में स्वार्थ नहीं होता। कथा के समापन पर आचार्य का स्वागत किया गया और शुकदेव जी की विदाई हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। संवाद
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