महेंद्रगढ़। सदियों से चली आ रही होली पर बाड़ लगाने की परंपरा को आज भी क्षेत्र के युवा निभा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में एक ही होली का दहन कर सामाजिक एकता एवं भाईचारे का संदेश दिया जाता है।
क्षेत्र के गांव अगिहार में हर वर्ष 30 फुट की सबसे ऊंची होलिका का दहन किया जाता है। युवा रात के समय कंटीली झाड़ियों, ईंधन व फसली अवशेषों से होली तैयार करते हैं। जिले के अधिकांश गांवों में होलिका पर रात के समय युवा बाड़ लगाने का काम करते हैं। होलिका से पूर्व की रात युवा सीढ़ी का प्रयोग कर होलिका की ऊंचाई बढ़ाने का काम करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी होलिका पर्व एकता एवं भाईचारे के प्रमुख पर्व के रूप में माना जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय युवाओं की टोलियां होली पर बाड़ लगाने के लिए एकत्रित होती है। पूरे गांव से झाड़ियों की बाड़, ईंधन, फसली अवशेष उठाकर होली पर लगाते हैं। प्राचीन समय से परंपरा चली आ रही है कि जो युवा विवाह योग्य हो जाते हैं वही होलिका पर बाड़ लगाने का काम करते हैं। युवाओं का उत्साह इतना अधिक होता है कि यह सबसे ऊंची होली बनाने के लिए रातभर बाड़ लगाने का काम करते हैं।
गांव अगिहार में विभिन्न समुदायों के लोग होने के बावजूद भी एक ही होली का दहन किया जाता है। ग्रामीण भी एकता एवं भाईचारे का संदेश देते हुए होलिका दहन के समय पके हुए जौ की बालियां भूनकर घरों में ले जाते हैं। सदियों से गांव में एक ही होलिका दहन किया जाता है।