कनीना। कनीना के पुराना बाजार में चल रही श्रीमद्देवी भागवत कथा के आठवें दिन तुलसी शालिग्राम के विवाह का प्रसंग सुनाया। कथा व्यास पंडित हेमराज भारद्वाज ने तुलसी विवाह की उपकथा विस्तार से सुनाई।
कथाव्यास ने बताया कि श्रीमद्देवी भागवत पुराण के अनुसार प्राचीन काल में जलंधर नामक राक्षस ने चारों तरफ बड़ा उत्पात मचा रखा था। वह बड़ा वीर और पराक्रमी था। उसकी वीरता का रहस्य था, उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रता धर्म। उसी के प्रभाव से वह विजयी बना हुआ था। जलंधर के उपद्रवों से परेशान देवगण भगवान विष्णु के पास गए और रक्षा की गुहार लगाई। उनकी प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु ने वृंदा का पतिव्रता धर्म भंग करने का निश्चय किया।
यह कहकर वृंदा अपने पति के साथ सती हो गई। जिस जगह वृंदा सती हुई वहां तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ। विष्णु ने कहा, हे वृंदा, यह तुम्हारे सतीत्व का फल है कि तुम तुलसी बनकर मेरे साथ ही रहोगी। जो मनुष्य तुम्हारे साथ मेरा विवाह करेगा, वह परम धाम को प्राप्त होगा। बिना तुलसी दल के शालिग्राम या विष्णु भगवान की पूजा अधूरी मानी जाती है। शालिग्राम और तुलसी का विवाह भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का ही प्रतीकात्मक विवाह माना जाता है।
इस दौरान गुरु शरण गुप्ता, राजेंद्र राठी, श्यामलाल सारस्वत, लक्ष्मी देवी, शकुंतला, कुसुम लता मास्टर नेमी चंद, योगेश गुप्ता, उमेद देवी, धर्मेंद्र, सुभाष कौशिक सतनाली नीरज, अनीता, गीता, रचना, राजदुलारी, कमलेश, प्रिया, प्रियंका यादव मौजूद रहीं।