नारनौल। अनाज मंडी स्थित श्री कृष्णा ड्रामेटिक क्लब के रंग मंच पर भगवान नारायण सेवा संस्था द्वारा आयोजित रामलीला में विभीषण शरणागत व अंगद-रावण संवाद की लीला का मंचन किया गया।
रामलीला का शुभारंभ समाजसेवी चंद्रकांत गुप्ता द्वारा गणेश पूजन के साथ किया गया। इसके बाद रामलीला में माता सीता की खोज करने गए पवन पुत्र हनुमान अपनी तलाश पूरी कर वापस लौटते हैं। वापस आने की सूचना वानर राज सुग्रीव को देने के बाद वानर सेना के साथ राम के पास पहुंचते हैं और विस्तार से माता सीता की ओर से कहे गए कथन तथा पूरे प्रसंग का वर्णन करते हैं। विभीषण की राम भक्ति से क्रोधित रावण उनको लंका से निकाल देते हैं। इसके बाद सभी वानर मिलकर समुद्र पर पत्थर का पुल बनाते हैं और सभी लंका पहुंच जाते हैं। राम के दूत अंगद दरबार में पहुंचते हैं और रावण से संवाद करते हैं। अंगद रावण से कहते हैं कि वे समय रहते अब भी भगवान राम को सीता लौटा दे तो राम तुम्हारा कल्याण कर देंगे। आक्रोशित रावण राम के दूत को दंड का फरमान सुनाता है, लेकिन अंगद शर्त रख देते हैं और कहते हैं कि कोई मेरा पैर टस से मस कर दे तो मैं मान जाऊंगा कि आप राम को पराजित कर सकते हैं। इसके बाद तमाम वीर कोशिश करते हैं लेकिन कोई भी इस शर्त को पूरा नहीं कर पाता। अंत में जब रावण पांव उठाने आता है तो अंगद पैर हटाकर उसे भगवान राम के पैर पकड़ने की सलाह देते हैं। इस अवसर पर रामलीला कमेटी के प्रभारी दयानंद सैनी, विजय जैन, मोनू भाटा, गौरव सिंगला, दास महेंद्र, सत्यनारायण भगतजी, रतन लाल, जोगेंद्र शर्मा, मुकेश शर्मा, मिशन सैनी, शंकर लाल सैनी मौजूद रहे।