नारनौल। नागरिक अस्पताल नारनौल में इन दिनों बंदर और कुत्तों का आतंक बना हुआ है, लेकिन इन्हें पकड़ने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। इसकी वजह से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बंदरों ने जच्चा-बच्चा वार्ड के पीछे खाली जगह में पेड़ों पर अपना ठिकाना बनाया है। वहीं दिन में कई बार अस्पताल परिसर में घुस जाते हैं। इससे शिशुओं और महिलाओं के साथ कोई भी अप्रिय घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
अस्पताल परिसर में प्रवेश द्वार के पास तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, लेकिन जच्चा बच्चा वार्ड के समीप बने मुख्य द्वार से बंदर व कुत्ते प्रवेश कर जाते हैं। उपचार के लिए आने वाले मरीजों का कहना है बंदर व कुत्ते के काटने का खतरा बना रहता है। इसलिए अस्पताल प्रशासन को पिछले द्वार पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए, ताकि उपचार के लिए अस्पताल आने वाले लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पडे़।
अस्पताल परिसर में मौजूद बंदरों और कुत्तों को पकड़ने के लिए अस्पताल प्रशासन कई बार नगर परिषद को पत्र लिख चुका है, लेकिन अब तक नगर परिषद ने बंदरों को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। जिस कारण समस्या बनी हुई है। नगर परिषद अधिकारियों का कहना है कि आचार संहिता के समाप्त होने के बाद आवारा पशु पकड़ने का टेंडर जारी किया जाएगा, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन में मौजूद बंदरों को पकड़ने का कार्य किया जाएगा।
वर्जन
प्रयास है कि अस्पताल आने वाले लोगों को बिना किसी परेशानी के बेहतर उपचार मिल सके। अस्पताल परिसर में मौजूद बंदरों को पकड़ने के लिए नगर परिषद को कई बार पत्र लिख जा चुका है, लेकिन नगर परिषद द्वारा अभी तक कोई समाधान नहीं किया गया है। इस कारण समस्या जस की तस बनी हुई है। -डॉ. कंवर सिंह, चिकित्सा अधिक्षक नागरिक अस्पताल, नारनौल
वर्जन:
अस्पताल सहित शहर के विभिन्न स्थानों से आवारा पशुओं को पकड़ने का कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा। आचार संहिता समाप्त होने के बाद आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे और टीमों का गठन किया जाएगा। -प्रवीण कुमार, जेई, नगर परिषद, नारनौल