फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mahendragarh-Narnaul News: हुनर के साथ ''खेल'', कैसे बढ़ाएंगे देश का मान

Mon, 06 Feb 2023 11:38 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
महेंद्रगढ़। शहर के बीचोंबीच स्थित एकमात्र खेल स्टेडियम पिछले दस वर्षों से रखरखाव के अभाव में बदहाल हो गया है।
खिलाड़ियों का कहना है कि यहां वर्षों से न कोच है न सुविधाएं ऐसे में वे कैसे पदक जीत लाएं। 13 वर्ष पूर्व शहर के बीचोंबीच करीब 5 एकड़ में बना यह अब स्टेडियम बेसहारा पशुओं व नशेड़ियों का अड्डा बना हुआ है। इन 13 सालों में लोगों ने मूलभूत सुविधाओं व कोच की नियुक्ति के लिए अनेक बार प्रयास किए लेकिन खेल विभाग चुप्पी साधे हुए है। प्रतिदिन शहर से स्टेडियम में अभ्यास के लिए आने वाले करीब 500 खिलाड़ियों व स्थानीय लोगों द्वारा बार-बार प्रशासन एवं खेल विभाग से सुविधाओं की मांग की जा चुकी है। लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के अभाव में स्टेडियम बदहाल हो चुका है। लाखों रुपये खर्च कर खिलाड़ियों को स्टेडियम में सुविधाएं देने के दावे आज भी धरातल पर नहीं उतर पाए हैं।
-
- तत्कालीन मुख्यमंत्री ने किया था उद्घाटन
वर्ष 2006 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शिलान्यास किया था। 10 वर्ष के बाद वर्ष 2010 में स्टेडियम के बनने के बाद उद्धाटन किया गया। खेल स्टेडियम के रखरखाव को लेकर खेल विभाग ने खिलाड़ियों को लेकर लाखों खर्च के बाद जिम का समान लगा दिया था ताकि यहां खिलाड़ी व युवा अभ्यास कर सकें। लेकिन कुछ शरारती तत्वों द्वारा सामान को तोड़ दिया गया। उसके बाद वर्ष 2021 में खेल स्टेडियम में खेलो इंडिया योजना के तहत बॉक्सिंग रिंग लगाकर खिलाड़ियों को बॉक्सिंग सिखाने का कार्य किया गया। महिला बॉक्सिंग कोच नहीं आने कारण उसे भी बंद कर सभी उपकरणों को नारनौल भेज दिया था।
विज्ञापन

- नाम का स्टेडियम, न सुविधाएं न कोच
राजीव गांधी खेल स्टेडियम में पिछले 13 सालों से कोच व सुविधाओं का इंतजार हो रहा है। समय-समय पर शहरवासियों एवं खिलाड़ियों द्वारा प्रशासन एवं सरकार से मांग भी की गई। प्रतिदिन आने वाले करीब 500 युवाओं व खिलाड़ियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्टेडियम में न तो शौचालय है और न ही पीने योग्य पानी की सुविधा है। खासकर महिला खिलाड़ियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके अलावा कहने को तो प्रशासन ने सफाई की हुई है। लेकिन जगह-जगह पर छोटी- छोटी झाड़ियां उगी हुई हैं जिससे खिलाड़ियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ये बोले खिलाड़ी

लंबे समय से स्टेडियम में न ही कोई कोच है और न ही कुछ मूलभूत सुविधाएं। खिलाड़ियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसी भी खेल के कोई उपकरण तक स्टेडियम में नहीं है। वहीं उबड़-खाबड़ ट्रैक पर दौड़ना भी संभव नहीं है। स्थानीय स्टेडियमों में खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधाएं नहीं हैं।
- प्रांजल


शहर का यह एकमात्र स्टेडियम है। प्रतिदिन करीब 500 खिलाड़ी, आमआदमी यहां आते हैं। लेकिन यहां पेयजल सहित अन्य प्रकार की मूलभूत सुविधाएं ही नहीं हैं। सुविधाओं के अभावों के कारण ही तो क्षेत्र के खिलाड़ी खेलों के मामले में पीछे रह गए हैं।
- गौरव कुमार
- महिला कोच की हो नियुक्ति: स्टेडियम में खेल उपकरण, खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं के साथ-साथ महिला कोच की भी नियुक्ति होनी चाहिए। सुविधाओं के अभावों में खिलाड़ी खेलों में विशेष नहीं कर पा रहे हैं। स्टेडियम होने के बावजूद भी सुविधाएं नहीं हैं।
- राशि

शहर में होने के कारण नियमित रूप से स्टेडियम में अभ्यास के लिए आते हैं। लेकिन यहां पर खेल विभाग की ओर से कोई सुविधा नहीं है। मैदान में कहीं पर भी साफ-सफाई नहीं है। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। उनकी मांग है कि स्टेडियम में खेल उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
विज्ञापन

- लक्की


हाल ही में स्टेडियम का निरीक्षण किया गया है। विभाग द्वारा इसके रखरखाव के लिए 25.53 लाख रुपये के बजट का एस्टीमेट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजा जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही बजट मिल जाएगा। बजट मिलते ही रखरखाव व मूलभूत सुविधाएं उपलब कराई जाएंगी।
- मदनपाल, कार्यवाहक जिला खेल अधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें