नारनौल। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर हुए आंदोलन में वैसे तो नारनौल के अनेक लोगों की भागीदारी रही, लेकिन उनमें से शहर के एक मोहल्ला संघीवाड़ा निवासी हरियाणा एग्रो के पूर्व चेयरमैन व वरिष्ठ भाजपा नेता गोविंद भारद्वाज व सिरसा निवासी सुरेश वत्स की विश्व हिंदू परिषद व संघ की तरफ से 25 दिन पूर्व हरियाणा प्रदेश की ओर से विशेष जिम्मेदारी लगाई गई थी। इसमें अपने-अपने प्रांत से अयोध्या पहुंचने वाले कार सेवकों की रहने, खाने तथा उन्हें अयोध्या तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था करना था। इसके लिए गोविंद भारद्वाज व सुरेश वत्स की लखनऊ रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी लगाई थी, क्योंकि गोविंद भारद्वाज बहुभाषी थे। इसके अलावा पूरे देश से कार सेवकों का जत्था अयोध्या पहुंच रहा था। इसलिए माहौल बिगड़ने के भय से ट्रेनों को लखनऊ स्टेशन पर ही रोका जा रहा था। इस प्रकार लखनऊ स्टेशन पर हरियाणा प्रांत से पहुंचने वाले कार सेवकों को संघ के दोनों नेताओं की ओर से वहां ठहराया गया। वहीं कार सेवकों के जत्थे में शामिल लोगों को पैकेट में भोजन उपलब्ध करवाया गया। जब उन्हें पता चला की अयोध्या में कार सेवकों को पुलिस द्वारा रोका जा रहा था तो उन्होंने कार सेवकों के जत्थों को अलग-अलग रास्तों के जरिए अयोध्या के लिए भेजा ताकि अधिक से अधिक लोग अयोध्या पहुंच सके।
आंदोलन के दौरान नारनौल निवासी कमांडेंट आरके स्वामी की थी ड्यूटी
अयोध्या राम मंदिर को लेकर चल रहे आंदोलन को देखते हुए विहिप व संघ की ओर से हरियाणा प्रदेश से गोविंद भारद्वाज व सुरेश वत्स की जिम्मेदारी लगाई थी। इसमें दोनों संघ नेता सबसे पहले अयोध्या पहुंचे थे। जहां उन्हें पता चला की सरकार की तरफ से नारनौल निवासी व गोविंद भारद्वाज के पड़ोसी 76 बटालियन के कमांडेंट आरके स्वामी की ड्यूटी लगाई है, जिसके बाद दोनों संघ नेता कमांडेंट आरके स्वामी के कैंप में जाकर उनसे मुलाकात की। जब दोनों नेता कमांडेंट से मुलाकात करके वापस चलने लगे तो सुरेश वत्स ने पड़ोसी होने के नाते गोविंद भारद्वाज से कार सेवकों पर गोलियां नहीं चलाने के लिए कमांडेंट से सिफारिश करने की बात कही, जिस पर गोविंद भारद्वाज ने कहा कि कमांडेंट भी एक हिंदू और यहां आ रहे लोग उनके परिवार के लोग है। इसलिए वे कार सेवकों पर गोलियां नहीं चलाएंगे ऐसा मेरा विश्वास है।