नारनौल। जिले में सरसों की कटाई का काम जोरों से चल रहा है तो कई जगहों पर सरसों की कटाई हो चुकी है, लेकिन बुधवार दोपहर को तेज हवाओं के साथ बादलवाही होने से किसानों की धड़कने बढ़ने लगी है। आगामी शुक्रवार से दिल्ली एनसीआर में तीन दिन तक बारिश के आसार हैं। बारिश से गेहूं की फसल के नुकसान को बचाने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों ने आगामी दो दिनों तक गेहूं की फसल में सिंचाई न करने की सलाह दी है। वहीं बादलवाही होने से अधिकतम व न्यूनतम तापमान में मंगलवार के मुकाबले थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को नारनौल का अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री व न्यूनतम तापमान 15.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
पर्यावरण क्लब के नोडल अधिकारी चंद्रमोहन ने बताया कि जल्द ही हरियाणा एनसीआर दिल्ली में मौसम करवट लेने वाला है। परंतु वर्तमान परिदृश्य में एक के बाद एक 16, 19, और 23 मार्च को सशक्त पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से मार्च महीने के दौरान मैदानी राज्यों में प्री मानसून गतिविधियां की संभावना बन रही है। वर्तमान समय में कई मौसम प्रणाली का मिलन जेट धाराओं का रूख दक्षिणी होने, सशक्त पश्चिमी विक्षोभ, पश्चिमी विक्षोभ की वजह से एक प्रेरित चक्रवातीय सरकुलेशन मध्य राजस्थान पर बनने से बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से प्रचुर मात्रा में नमी वाली दक्षिणी पूर्वी और दक्षिणी पश्चिमी हवाएं से यानी पूर्वी और पछुआ हवाओं के टकराव से मौसम करवट लेने वाला है और प्री मानसून गतिविधियां तेज गति की हवाएं, अंधड़, हल्की से मध्यम बारिश गरज चमक के साथ एक दो स्थानों पर ओलावृष्टि की गतिविधियों की संभावना बन रही है। वीरवार को मौसम प्रणाली उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों पर सक्रिय होने से मौसम की स्थिति में बदलाव देखा जाएगा और अगले सप्ताह भी जारी रहेगा। 16 से 22 मार्च के दौरान प्री मानसून गतिविधियां देखने को मिलेगी। जिला महेंद्रगढ़ में नारनौल और महेंद्रगढ़ का दिन का तापमान क्रमश 33.4 डिग्री सेल्सियस और 32.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। बादलवाही की वजह से जिला महेंद्रगढ़ में दिन के तापमान में हल्की गिरावट दर्ज हुई है जबकि जिला में दिन के तापमान सामान्य से 3.0 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है।
फसलों के लिए नुकसानदायक
मौसम विभाग के अनुसार तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है। अगर तेज हवाओं के साथ बारिश हुई तो गेहूं की फसल में सबसे ज्यादा नुकसान होने की संभावना है। ऐसे मौसम में पानी की अधिकता इन फसलों को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल बिछ सकती है। इसके अलावा सरसों की फसल भिगने का डर भी किसानों को सता रहा है। नारनौल क्षेत्र में अधिकतर जगहों पर किसानों ने सरसों फसल की कटाई कर इसको एकत्रित की हुई है। जिसको अब थ्रेसिंग करनी है। तेज बारिश व ओलावृष्टि से सरसों की फसल में भी नुकसान होना निश्चित है।