नारनौल। मुख्यमंत्री की घोषणाओं को पूरी करने के लिए शनिवार को नगर निकाय के निदेशक डॉ. यशपाल यादव ने नारनौल के लघु सचिवालय परिसर में नगर परिषद के अधिकारियों व नगर पार्षदों के साथ बैठक की। इस दौरान सभी पार्षद व अधिकारियों ने शहर की समस्याओं के बारे में अवगत करवाया।
बैठक में एक पार्षद ने अपने वार्ड को नगर परिषद से अलग करने तक की मांग निदेशक से कर डाली। पार्षद का कहना था कि नगर परिषद में आने के बाद वार्ड की समस्या अधिक बढ़ गई। वहीं छलक नाला, डोर टू डोर कूड़ा उठान नहीं होने जैसी समस्या से निदेशक को अवगत करवाया गया। निदेशक डॉ. यशपाल यादव ने छलक नाले को लेकर कहा कि अगर बिल को लेकर कोई खामी पाई जाती है तो अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। निदेशक ने कहा कि अगर कोई गलत करता है तो उस पर कार्रवाई की जा जाएगी। सरकार के नियम सभी पर समान रूप से लागू है। उन्होंने कहा कि अगर डोर टू डोर कूड़ा समय पर नहीं उठाया जा रहा है तो ठेकेदार के रुपये काटे जाएंगे। वह जितने घरों से कूड़ा उठाएगा, उतना ही भुगतान किया जाएगा। फिर भी वह सही से कूड़ा नहीं उठान करता है तो टेंडर रद कर दिया जाएगा। बैठक के बाद निदेशक नगर परिषद कार्यालय पहुंचे। वहां अधिकारियों से निर्माणाधीन भवन के बारे में जानकारी ली।
सफाई कर्मियों की कमी का भी उठा मुद्दा
नगर परिषद के 207 सफाई कर्मी होने की वजह से नगरपरिषद क्षेत्र में समय पर साफ-सफाई नहीं हो पा रही है। इस पर नगर निकाय निदेशक ने कहा कि सफाई कर्मियों की कमी का प्रस्ताव बनाकर देने के लिए कहा है, जिसके बाद सफाई कर्मियों की कमी को दूर किया जाएगा।
नगर परिषद से अपने वार्ड को बाहर करने की मांग
नगर पार्षद प्रतिनिधि सुमेर कांडा ने नगर निकाय विभाग के निदेशक के सामने अपने वार्ड को नगर परिषद की सीमा से बाहर करने की माग रखी। उन्होंने कहा कि नगर परिषद में शामिल होने के बाद वार्ड की हालात खराब हो गई है। वार्ड में न तो समय पर साफ सफाई हो रही है और न ही अन्य मुलभूत सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ उन्होंने शहर की समस्याओं से भी अवगत करवाया। पार्षद संदीप भांखर ने कहा कि नगर परिषद के अधिकारी पार्षदों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं देते हैं। पटीकरा गांव से महिला पार्षद ऋतु के प्रतिनिधि भास्कर ने कहा कि वह तो पार्षद बनकर अपने आप को बड़ा शर्मिंदा महसूस कर रहा हैं। सड़क के बीच दो फीट, एक छोटे से गड्ढे को भरवाने में भी वह भी असमर्थ है ।
पार्षद अजय सिंघल ने छलक नाले की जांच नहीं होने का उठाया मुद्दा
पार्षद अजय सिंघल ने कहा कि नारनौल नगर परिषद की हाउस की 23 अगस्त को हुई बैठक में बरसात के समय नारनौल के नालों की सफाई और मरम्मत के लिए 40 लाख के ठेके की विजिलेंस से जांच करवाने पर सर्वसम्मति हुई थी, लेकिन इसके बाद भी नगर परिषद अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर डोर टू डोर कूड़ा उठाने के लिए छोड़े गए टेंडर को रद्द करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि यह कंपनी नौ माह बीत जाने के बाद भी टेंडर के नियम व शर्त पूरी नहीं कर रही है। 34 करोड़ की लागत से बना रहे छलक नाले में 24 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है, इसलिए यह भी प्रस्ताव पास किया गया था कि जब तक छलक नाले का निर्माण कार्य पूरा न हो तब तक फर्म को बाकी का भुगतान न किया जाए, लेकिन इसके बाद भुगतान करने की कोशिश की जा रही है। शहर में स्ट्रीट लाइटों की बहुत आवश्यकता है, लेकिन अब तक खरीद नहीं की गई है। स्ट्रीट लाइटों की खरीद कर सभी वार्डों में लगाने की मांग की गई।