फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mahendragarh-Narnaul News: खांसी, बुखार व जुकाम के मरीज बढ़े, ओपीडी 150 पार

विज्ञापन
विज्ञापन
नारनौल। मौसम में बदलाव आने से नागरिक अस्पताल में बच्चों की ओपीडी 150 के पास पहुंच गई है। इन बच्चों में ज्यादातर खांसी, जुकाम व बुखार के मरीज पहुंच रहे हैं। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने की वजह से सर्दी, जुकाम और बुखार की जल्दी चपेट में आ रहे हैं। ऐसे मौसम में खानपान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। बच्चों को लेकर अभिभावक सुबह आठ बजे से ही नागरिक अस्पताल में पहुंचने शुरू हो जाते हैं। इस समय बच्चों के साथ-साथ बुजुर्गों को भी खांसी, जुकाम व बुखार से परेशान होना पड़ रहा है, जैसे ही बारिश होती है तापमान में गिरावट हो जाती है, वहीं मौसम साफ होते ही तापमान में अचानक बढ़ोत्तरी हो जाती है, जिसकी वजह से भी बच्चों के साथ-साथ बुजुर्ग भी मौसमी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। नागरिक अस्पताल में एक सप्ताह से मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होने के पीछे मौसम में बदलाव होना भी है, जिसके लिए चिकित्सक मरीजों को अपने खान-पान पर ध्यान देनी की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि अगर पानी स्वच्छ नहीं होगा तो टाइफाइड, हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।
विज्ञापन




जुकाम, खांसी व बुखार होने पर चिकित्सक से लें उपचार
बच्चों में खांसी, जुकाम व बुखार के लक्षण दिखाई दे तो तत्काल चिकित्सक से उपचार शुरू करवाना चाहिए। अगर चिकित्सक को दिखाने में देरी की जाती है तो बच्चों की हालात ज्यादा गंभीर हो सकती है। इस मौसम में विशेषकर छोटे बच्चों के आसपास सफाई रखी जाए।



वायरल बुखार के लक्षण

-नाक बहना और आंखों से पानी गिरना

-सिर में दर्द होना
-शरीर और जोड़ों में दर्द होना
-हल्का व तेज बुखार आना







बचाव के उपाय

-मौसम अनुसार बच्चों को पूरे कपड़े पहनाएं

-पानी उबालकर बच्चों को पिलाया जाए
-ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करने से बचें
-चिकित्सक की सलाह पर ही दवा का सेवन करें

-खांसी-जुकाम होने पर गुनगुने पानी का सेवन करें और मास्क जरूर पहनें





दिन-रात के मौसम में बदलाव हो रहा है। इस समय पहनावे का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसे मौसम में बच्चों को पानी उबालकर पिलाना चाहिए। अगर स्वच्छ पानी नहीं पिलाया जाएगा तो टाइफाइड व हेपेटाइटिस जैसी बीमारी भी हो सकती है। इसके साथ शरीर में पानी की कमी नहीं होने दे। वहीं छोटे बच्चों के गीले कपड़े समय-समय पर बदलते रहे, जिससे मौसमी बीमारियों से उन्हें बचाया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन


डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, शिशु व बाल रोग विशेषज्ञ नारनौल।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें