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निजीकरण का विरोध, हड़ताल में भाग लेगी रोडवेज कर्मचारी यूनियन

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हरियाणा कर्मचारी महासंघ व ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर 23 व 24 फरवरी को होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल में रोडवेज कर्मचारी भाग लेंगे। राज्य प्रधान ओमप्रकाश ग्रेवाल, महा सचिव जयवीर घणघस, डिपो प्रधान अनिल ने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार लगातार कर्मचारी विरोधी नीति अपनाकर व वादाखिलाफी कर कर्मचारियों को आंदोलन करने पर मजबूर कर रही है। जिसके चलते कर्मचारियों ने 23 व 24 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का फैसला लिया है। केंद्र व राज्य सरकार की निजीकरण नीतियों के खिलाफ कर्मचारियों में गुस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने बार-बार कर्मचारियों की लंबित मांगों को नाजायज मानते हुए रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। सरकार द्वारा मानी गई मांगों को लागू करने की बजाय कर्मचारियों को पहले से मिल रही सुविधाएं छीन ली गई हैं। उनकी मांग सभी विभागों में पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने, सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, खाली पदों पर पक्की भर्ती करना, योग्यता के आधार पर चालक को तकनीकी निरीक्षक के पद पर प्रमोट करना, 1992 से लेकर 2002 तक के कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से पक्का करना, बकाया बोनस का भुगतान करना, निजी बसें ठेके पर लेने की नीति रद्द करना, अनुकंपा अधिनियम-1964 को पहले की भांति लागू किया जाए। मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी देने की नीति में लगाई गई शर्तें हटाने, कोरोना महामारी से मृतक रोडवेज कर्मचारियों के परिवारों को एक्सग्रेसिया बीमा पॉलिसी के तहत 50 लाख रुपये मुआवजा देने, वेतनमान अपग्रेड करने, परिचालक व लिपिकों का 35400 रुपये वेतनमान अपग्रेड करने सहित अन्य कर्मचारियों को पंजाब के समान वेतनमान देने, सभी कर्मचारियों को 5000 रुपये जोखिम भत्ता देने, कच्चे कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से पक्का करने, रोडवेज के बेड़े में 10000 बसें शामिल करना, परिवहन समिति की बसों को लंबे रूटों पर परमिट देना नीति को रद्द करना। कर्मचारी नेताओं ने सरकार की कर्मचारी व जन विरोधी नीतियों की जमकर आलोचना करते हुए कहा कि रोडवेज कर्मचारियों हड़ताल में बढ़-चढ़कर भाग लेंगे।
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