नारनौल। लंबे समय से पेयजल और सीवरेज अव्यवस्था से जूझ रहे नारनौल शहर को जल्द ही राहत मिलने की संभावना है। नारनौल शहर को अटल मिशन फॉर रेजुवेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉरमेशन योजना (अमरूत-2) में शामिल किया गया है। इस योजना के तहत शहर की पेयजल और सीवरेज व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। इसके लिए जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की तरफ से निजी सर्वे एजेंसी को हायर किया है। कंपनी द्वारा जो रेट टेंडर में दिए गए थे, उसकी मंजूरी के लिए फाइल को मुख्यालय भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद कंपनी शहर में सर्वे करेगी। सर्वे में यह देखा जाएगा कि शहर में कितनी नई सीवरेज व पेयजल पाइप लाइन डाली जाएगी। कितनी पुरानी लाइन को ठीक करने की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा जितने जलघर बनाने होंगे। साथ ही कितने पार्कों में रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। साथ ही शहर के तालाबों की मरम्मत का काम भी किया जाएगा। सर्वे कंपनी द्वारा विस्तृत डीपीआर तैयार कर जन स्वास्थ्य विभाग को सौंपी जाएगी। उसके बाद विभाग द्वारा अमरूत-2 के तहत काम शुरू करवाया जाएगा। जन स्वास्थ्य विभाग की माने तो इस अमरूत-2 प्रोजेक्ट पर लगभग 100 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, लेकिन सर्वे कंपनी की माने तो लगभग 125 करोड़ रुपये का खर्च आने की उम्मीद है। फिलहाल कंपनी की तरफ से जो बढ़ा हुए रेट दिए गए हैं, उसकी मंजूरी के लिए मुख्यालय फाइल भेज दी गई है। मंजूरी आने के बाद ही सर्वे का काम शुरू होगा।
34 नई कॉलोनियों और 9 गांव भी किए शामिल
अमरूत-2 योजना में शहर की वैध कालोनियों के अलावा अवैध कॉलोनियों को भी शामिल किया गया है। हाल ही में 34 नई कॉलोनियों को अप्रूवड करने का सर्वे किया गया है। उन सभी को भी इस प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। इसी प्रकार से नगर परिषद एरिया में शामिल हुए नए 9 गांवों को भी इसमें शामिल किया गया है। इसमें कोजिंदा, पटीकरा, नीरपुर, नसीबपुर, नूनी शेेखपुरा, मांदी, ढाणी किरारोद के अलावा दो बेचिराग गांवों को शामिल किया गया है।
नहरी पेयजल पर आधारित शहर, एक दिन छोड़कर आता है पानी
नारनौल शहर नहरी पानी पर आधारित है। जवाहर लाल नेहरू नहर में पानी आने के बाद उसे आगे रेवाड़ी और नसीबपुर स्थित स्टोरेज टैंकों को भरा जाएगा। उसके बाद आगे स्टोरेज टैंकों से पानी की सप्लाई घरों में की जाती है। इस बार नहर 20 अप्रैल को आई थी। अब 5 या 6 मई को बंद हो जाएगी। टैंक भरने के बाद जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक दिन छोड़कर शहर में पानी की सप्लाई की जाती है। ऐसे में लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी स्टोरेज करना पड़ता है। पीने के पानी के लिए शहर के लोगों को कैंपर आधारित सप्लाई पर निर्भर रहना पड़त रहा है।
उनके मोहल्ले में कई दिनों से दूषित पानी आ रहा है। जो पीने लायक नहीं है। पानी भी 10 से 15 मिनट ही आता है। यह पानी पीने लायक नहीं है। टैंकर मंगवाकर काम चलाना पड़ रहा है। नई योजना से कोई सुधार होता है तो बेहतर है।
ज्योति कुमार अरोड़ा
कुछ दिनों से पानी की सप्लाई कम आ रही है। सप्लाई में दूषित पानी भी आ जाता है, लेकिन विभाग ध्यान नहीं दे रहा। इसलिए पानी खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है।
अमित कुमार, सैन चौक
पानी की कोई निर्धारित टाइमिंग नहीं है। अब गर्मी में पानी की समय अवधि घटा दी गई है। पहले पानी एक घंटा आता था, अब आधा घंटा कर दी गई है।
प्रकाश, संघीवाड़ा मोहल्ला
नारनौल शहर में अमरूत-2 योजना के तहत काम होना है। इसमें पेयजल व सीवरेज पर काम होना है। फिलहाल सर्वे के लिए एक कंपनी को टेंडर दिया है। उसके रेट की मंजूरी आना बाकी है। मंजूरी आते ही कंपनी द्वारा सर्वे शुरू कर दिया जाएगा। उसके बाद डीपीआर तैयार करवाई जाएगी।
आरके शर्मा, एसई, जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग