फोटो संख्या:76- श्रीराम कथा व दुर्लभ सत्संग कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु--स्रोत--आयोजक
सतनाली। गांव श्यामपुरा के हनुमान मंदिर में नौ दिवसीय श्रीराम कथा एवं दुर्लभ सत्संग के आठवें दिन श्रद्धालुओं को माता सबरी व लंका दहन की कथा सुनाई गई।
महाराज हरिदास ने बताया कि सबरी का असली नाम श्रमणा था, ये भील सामुदाय के शबर जाति से संबंध रखती थीं। इसी कारण कालांतर में उनका नाम शबरी हुआ, सबरी के पिता भीलों के मुखिया थे, उन्होंने शबरी का विवाह भील कुमार से तय कर दिया। शादी से पहले कई भेड़-बकरियों को बली के लिए लाया गया। जिन्हें देखकर शबरी का मन विचलित हो उठाए, क्योंकि उन्हें बेजुबान जानवरों से बेहद लगाव था। निर्दोष जानवरों की हत्या को रोकने के लिए शबरी विवाह से एक दिन पूर्व घर से भागकर जंगल चली गईं और सभी जानवरों को बचा लिया। माता शबरी को रामायण के पात्रों में विशेष स्थान दिया गया है। शबरी माता ने अपना संपूर्ण जीवन श्रीराम की भक्ति में बिताया रामायण के अनुसार सीता की खोज करते हुए भगवान राम की शबरी से भेंट हुई थी। उन्होंने बताया कि राजा रावण ने हनुमान की पूंछ में आग लगाने का आदेश देते हैं तो हनुमान जी रावण की सोने की लंका को जलाकर उसका अहंकार तोड़ देते है। कल कथा के दौरान रामराज्य अभिषेक होगा।