नारनौल। ठंड का आगाज होते ही जिले की आबोहवा खतरनाक श्रेणी में पहुंचने लगी है। इसके चलते सुबह स्मॉग का असर नजर आने लगा है।
राजकीय महाविद्यालय के पर्यावरण क्लब के नोडल अधिकारी डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि मौसम में बदलाव होने के साथ ही कोहरा बनना शुरू हो जाता है और हवाएं शांत हो जाती हैं। दिवाली के बाद वायु प्रदूषण बढ़ जाता है। इस समय फसलों की कटाई का कार्य भी शुरू हो जाता है। सख्ती के बाद भी पराली जलाने, दिवाली पर आतिशबाजी करने वायु में प्रदूषकों की मात्रा में बढ़ोतरी दर्ज होती है। इसकी वजह से हरियाणा की आबोहवा खतरनाक श्रेणी में पहुंच गई है। शुक्रवार को हरियाणा एनसीआर दिल्ली में अधिकतर स्थानों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक में गिरावट जारी रही। केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों अनुसार नारनौल का वायु गुणवत्ता सूचकांक 305 पर पहुंच गया।
स्मॉग कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण है। इससे अस्थमा, फेफड़े के ऊतकों को नुकसान, फेफड़ों का संक्रमण, हृदय की समस्याएं, त्वचा रोग, बालों का गिरना, आंख नाक गले में जलन, उच्च रक्तचाप, शरीर की रक्षा प्रणाली का कमजोर होना और ब्रेन स्ट्रोक की आशंका सहित कई जोखिम शामिल हैं।
बाहर जाने से बचें, बरतें सतर्कता
डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि स्मॉग से बचाव के लिए सतर्कता बरतनी जरूरी है। लंबी अवधि के लिए बाहर रहने से बचें। व्यायाम घर पर ही करें। अगर आंखों में जलन होती है तो उन्हें अच्छी तरह धोए।ऐसा करने से कोई राहत नहीं मिलती है तो डॉक्टर को दिखाएं। घर से निकलने के समय चश्मा और मास्क पहनें। घर छोड़ने से पहले अपने चेहरे को ढंके। अक्सर बाहर जाना पड़ता है तो चेहरे पर मुखौटा या रुमाल का प्रयोग करें। बिटामिन सी, मैग्नीशियम, ओमेगा फैटी एसिड, अदरक, तुलसी, और काली मिर्च की चाय पीने से प्रतिरक्षण प्रणाली में सुधार होगा जिससे रोगों से लड़ने की हमारी क्षमता बढ़ जाती है।