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Mahendragarh-Narnaul News: हस्त नक्षत्र के शुभ संयोग में मनाई जाएगी नाग पंचमी

Fri, 09 Aug 2024 12:36 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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फोटो संख्या:57- मांडोला में ​स्थित बाबा केसरिया का मंदिर--संवाद
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महेंद्रगढ़। हिंदू धर्म में हर पर्व और त्योहार को विशेष तरीके से मनाया जाता है। हिंदू पंचांग अनुसार श्रावण मास की शिवरात्रि के बाद प्रत्येक वर्ष श्रावन माह की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज ने बताया कि इस वर्ष नाग पंचमी 9 अगस्त को मनाई जाएगी। नाग पंचमी के लिए नाग देवता और शंकर भगवान की विशेष रूप से पूजा अर्चना की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार जनमेजय अर्जुन के पौत्र राजा परीक्षित के पुत्र थे।
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जब जनमेजय ने पिता की मृत्यु का कारण सर्पदंश जाना तो उसने बदला लेने के लिए सर्पसत्र नामक यज्ञ का आयोजन किया। नागों की रक्षा के लिए यज्ञ को ऋषि आस्तिक मुनि ने श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन रोक दिया और नागों की रक्षा की। इस कारण तक्षक नाग के बचने से नागों का वंश बच गया। आग के ताप से नाग को बचाने के लिए ऋषि ने उनपर कच्चा दूध डाल दिया था तभी से नागपंचमी मनाई जाने लगी। वहीं नाग देवता को दूध चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।
नाग देवता की पूजा से इन दोषों से मिलेगी मुक्ति
नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा करने से न केवल उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है बल्कि कई तरह की परेशानियों से भी मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से जिन व्यक्तियों की कुंडली में कालसर्प दोष होता है, उनके लिए नाग पंचमी का दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर कालसर्प दोष से पीड़ित है या राहु-केतु के कारण जीवन में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, तो नाग पंचमी के दिन सांपों की पूजा करने से राहु-केतु का बुरा प्रभाव भी कम हो जाता है। इस दिन शंकर भगवान रुद्राभिषेक योग्य विद्वान ब्राह्मण से करवाना चाहिए और नाग-नागिन का जोड़ा बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए। ऐसा करने से इन दोषों से मुक्ति मिलती है। आज के दिन पर कहीं सर्प के दर्शन हों तो उसे कच्चा दूध पिलाएं।
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यह रहेगा पूजा का शुभ योग
इस बार नाग पंचमी पर कई योग बनने वाले हैं। इनमें शिव वास योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, साध्य योग, बव और बालव, करण योग शामिल हैं। इस बार नाग पंचमी हस्त नक्षत्र के शुभ संयोग में मनाई जाएगी। शिव वास योग में भगवान शिव कैलाश पर मां पार्वती के साथ वास करते हैं। इस समय में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय के साथ नाग देवता की पूजा करने से सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। जीवन में आ रही हर समस्या दूर होंगी। जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच स्थित होते हैं, तो इसे कालसर्प दोष माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार यह दोष जीवन में कई तरह की समस्याएं पैदा करता है। ऐसी स्थिति में नाग पंचमी के दिन कालसर्प दोष से पीड़ित जातकों के लिए आज दिन विशेष है।
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