फोटो नंबर-03नारनौल का प्राचीन मां नैना फतेह देवी मंदिर। संवाद
नारनौल। नवरात्र को लेकर शहर के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के पास मुख्य सड़क मार्ग पर स्थित प्राचीन मां नैना फतेह देवी मंदिर लोगों के विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है।
शहर में माता के सबसे प्राचीन दो ही मंदिर हैं। इनमें एक मां चामुंडा देवी मंदिर व दूसरा मां नैना फतेह देवी मंदिर है। मां नैना फतेह देवी मंदिर का निर्माण पटियाला के महाराज द्वारा करवाया गया था। इतिहासकारों के अनुसार पटियाला महाराज ने रेस्ट हाउस रोड पर मां नैना फतेह देवी मंदिर व पुरानी कचहरी में गुरुद्वारा दोनों साथ-साथ ही बनाए थे। मां नैना फतेह देवी मंदिर आज भी प्रशासन के अधीन है। फिर भी इसे सरकार व प्रशासन से कोई खास सुविधा उपलब्ध नहीं होती है। प्राचीन समय में मंदिर के अंदर पत्थर डले हुए थे व केवल मां नैना फतेह देवी की ही प्रतिमा विराजमान थी। फिलहाल मंदिर में भक्तों द्वारा काफी जीर्णोद्धार करवाया गया है। मंदिर में पत्थरों की जगह टाइल्स व मां नैना फतेह देवी की प्रतिमा के साथ-साथ शिव परिवार, राधा-कृष्ण, पंचमुखी हनुमान, मनसा देवी व काली माता की प्रतिमाएं भी विराजमान की गई है। नवरात्र के अंदर माता रानी के दर्शन करने के लिए रोजाना सुबह-शाम भारी संख्या में लोग आते हैं। माता रानी का रोजाना भव्य शृंगार किया जाता है व दोनों समय आरती की जाती है। इसके अलावा पूरे नवरात्र में दोपहर के समय महिलाएं सत्संग भी करती है। मां नैना फतेह देवी मंदिर में 11 अक्तूबर शुक्रवार शाम नवरात्र को लेकर भंडारा भी आयाेजित होगा।
नवरात्र में दूर-दराज से लोग यहां दर्शन करने के लिए आते हैं। मां नैना फतेह देवी का मंदिर पटियाला महाराज ने बनवाया था। इस मंदिर में सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाएं विराजमान हैं। जो भी भक्त नवरात्र में मां नैना फतेह देवी की मन से पूजा करता है माता रानी उसके सभी मनोरथ पूर्ण करती है।
-महंत कैलाश हरित, पुजारी मां नैना फतेह देवी मंदिर