महेंद्रगढ़। मां दुर्गा का तीसरा रूप चंद्रघंटा है। नवरात्र के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। नवरात्र में 5 व 6 अक्तूबर को दो दिन तृतीया दिन रहेगी। इस कारण इन दोनों दिनों में माता चंद्रघंटा की जाएगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज ने बताया कि मां चंद्रघंटा देवी पार्वती का विवाहित रूप है। भगवान शिव से विवाह करने के बाद मां ने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र सजाना शुरू कर दिया था, इसीलिए मां पार्वती को मां चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है।
मां चंद्रघंटा शेर पर सवार हैं, जो धर्म का प्रतीक हैं। मां चंद्रघंटा अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूरा करती हैं। मां यह स्वरूप बेहद ही सुंदर, मोहक, अलौकिक, कल्याणकारी व शांतिदायक है। मां अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उन्हें शांति व समृद्धि प्रदान करती हैं। मां चंद्रघंटा संसार में न्याय व अनुशासन स्थापित करती हैं। माता चंद्रघंटा को गाय का दूध या दूध से बनी मिठाई और खीर का भोग लगाना चाहिए।