महेंद्रगढ़। नवरात्र के तीसरे दिन माता भूरा भवानी मंदिर में देवी दुर्गा का तीसरा स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की गई। महंत शक्तिनाथ महाराज ने बताया कि माता चंद्रघंटा के मस्तक पर एक घंटे के आकार का चंद्रमा है। इसी के चलते माता का नाम चंद्रघंटा पड़ा। इस नाम में एक अद्वितीय तेज और ममता समाहित है।