नारनौल। जिले में घूम रहे बेसहारा गोवंश को नजदीकी गोशालाओं में भेजने के लिए सोमवार को डीसी मोनिका गुप्ता ने जिले की सभी गोशालाओं के संचालकों के साथ बैठक की। बैठक में डीसी ने बताया कि बेसहारा गोवंश को गोशालाओं में विस्थापित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान पुनर्वासित गोवंश का उचित रिकॉर्ड रखने के लिए गुलाबी रंग की इयर टैगिंग की जाएगी। इसमें 12 अंकों का बार कोड होगा। नए पुनर्वासित गोवंश को अलग रखना होगा, ताकि नए पुनर्वासित गोवंश की गिनती आसानी से की जा सके।
उन्होंने बताया कि सरकार के निर्देश अनुसार अतिरिक्त गोवंश के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे के लिए 7000 प्रति गोवंश एवं दैनिक आधार पर 20 रुपये बछड़ियों, 30 रुपये गाय व 40 रुपये नंदी के लिए दिए जाएंगे। इस योजना में शामिल होने के लिए एक गोशाला को कम से कम 50 पशु लेने होंगे। उन्होंने बताया कि इनके लिए चारा अनुदान के तौर पर छोटे पशुओं के लिए 20 रुपये, बड़े पशुओं के लिए 30 रुपये व नदी के लिए 40 रुपये प्रति मवेशी प्रतिदिन दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिला की पंजीकृत गोशालाओं को इस साल एक करोड़ 38 लाख रुपये की चारा अनुदान के तौर पर सहायता दी जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि विकास एवं पंचायत विभाग हरियाणा ग्रामीण क्षेत्र से बेसहारा पशुओं को पकड़ने और गंतव्य सूची के अनुसार पहले से मौजूद गोशालाओं तक पहुंचाने के लिए जिम्मेदार होगा। शहरी स्थानीय निकाय विभाग, शहरी क्षेत्र से आवारा पशुओं को पकड़ने और गंतव्य सूची के अनुसार पहले से मौजूद गोशालाओं तक पहुंचाने के लिए जिम्मेदार होगा।
इस संबंध में पशुपालन विभाग के डीडीए डॉ. नसीब सिंह ने बताया कि जिला में 21 पंजीकृत गोशालाओं में 18500 गोवंश मौजूद हैं। फिलहाल जिला में लगभग 4500 आवारा गोवंश है। मुख्यमंत्री के निर्देश अनुसार इन सभी को विभिन्न गोशालाओं में भेजा जाना है। इस मौके पर गोशाला संचालकों ने गो संरक्षण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। डीसी मोनिका गुप्ता के आह्वान पर सभी गोशाला संचालकों ने जिले को बेहासरा पशु मुक्त करने का संकल्प लिया।