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Mahendragarh: केबीसी से करोड़पति बने मयंक का फार्मूला- कम पढ़ें...पर अच्छे से पढ़ें

Fri, 01 Dec 2023 09:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल

सार

आरपीएस ग्रुप की चेयरपर्सन डॉ. पवित्रा राव ने कहा कि मयंक ने निश्चित रूप से न केवल आरपीएस स्कूल बल्कि पूरे क्षेत्र, जिले व प्रदेश ही नहीं देश में नाम रोशन किया है। इस उपलब्धि के लिए मयंक और उसके परिवार को बधाई देते हुए घोषणा की कि मयंक की पढ़ाई भी 12वीं कक्षा तक निशुल्क होगी।
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आरपीएस स्कूल का छात्र मयंक अपने माता-पिता व स्कूल स्टाफ के साथ। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोई भी विद्यार्थी भले ही कम पढ़े लेकिन उसे अच्छी प्रकार से पढ़े तथा अपने निर्धारित लक्ष्य को पाने के लिए कठिन परिश्रम भी जरूरी है। यह कहना है कौन बनेगा करोड़पति कार्यक्रम में हाल ही में करोड़पति बनकर लौटे 13 वर्षीय आरपीएस स्कूल के आठवीं कक्षा के छात्र मयंक का।

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मयंक ने बताया कि यह उपलब्धि उसने अपने पिता के सपने को साकार करने के लिए हासिल की है। अभी मुझे अपना लक्ष्य पाने के लिए आगे बढ़ना है। केबीसी में करोड़पति बनने वाले मयंक का लक्ष्य है कि वह एक अच्छा इंजीनियर बनकर देश की सेवा करें। अपनी उपलब्धि के लिए अपने माता-पिता के साथ-साथ अपने स्कूल प्रबंधन व गुरुजनों को देते हुए सभी बच्चों के लिए संदेश दिया कि कोई भी विद्यार्थी प्रेशर में न पढ़ें, भले ही वह थोड़ा पढ़ें, परंतु उसे अच्छी प्रकार से पढ़े, तभी वह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।

वह 7 करोड़ पॉइंट के लिए खेल में आगे नहीं बढ़ा इस बात का उसे कोई दुख नहीं है क्योंकि उसके पापा का सपना था कि वह हॉट सीट पर एक करोड़ पॉइंट जीते, जिसे उसने पूरा कर दिखाया है। आरपीएस ग्रुप की चेयरपर्सन डॉ. पवित्रा राव ने कहा कि मयंक ने निश्चित रूप से न केवल आरपीएस स्कूल बल्कि पूरे क्षेत्र, जिले व प्रदेश ही नहीं देश में नाम रोशन किया है। इस उपलब्धि के लिए मयंक और उसके परिवार को बधाई देते हुए घोषणा की कि मयंक की पढ़ाई भी 12वीं कक्षा तक निशुल्क होगी।
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आरपीएस ग्रुप के सीईओ इंजीनियर मनीष राव ने भी मयंक और उसके माता-पिता को बधाई दी। मयंक ने कौन बनेगा करोड़पति कार्यक्रम में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए यह मुकाम हासिल किया है। इस दौरान मयंक के पिता प्रदीप कुमार, माता बबीता ने बताया कि उनका बेटा हमेशा ही अपनी पढ़ाई के प्रति गंभीर रहता है। मयंक की पढ़ाई के लिए उन्होंने कोई ट्यूशन की व्यवस्था नहीं की है। वह जो काम करता है अपने स्वयं के दिमाग से करता है। मोबाइल का उपयोग भी वह हमेशा नई-नई जानकारियां खोजने के लिए ही करता है। इसके साथ-साथ वह समाचार पत्रों को अपनी उपलब्धि का एक जरिया मानता है।

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