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पांच नवंबर को बन रहे कई शुभ योग, निसंतान महिलाओं को आवश्यक करना चाहिए अहोई व्रत: राहुल भारद्वाज

Sat, 04 Nov 2023 12:17 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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ज्योतिषाचार्य राहुल भारद्वाज।
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महेंद्रगढ़। हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। अहोई अष्टमी का व्रत हिंदू धर्म में काफी अधिक महत्व होता है। इस व्रत को महिलाएं संतान की लंबी आयु, स्वास्थ्य उनके खुशहाल जीवन के लिए करती है।
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मान्यता है कि जो महिला निसंतान है, उन्हें अहोई अष्टमी का व्रत जरूर रखना चाहिए। अहोई अष्टमी का व्रत बेहद महत्वपूर्ण और शुभ फलदायी माना जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज गढ़ी ने बताया की इस साल अहोई अष्टमी का व्रत पांच नवंबर रविवार को रखा जाएगा। शास्त्रानुसार व्रत वाले दिन अहोई माता की पूजा भी की जाती है और महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और रात्रि के समय तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत संतान के लिए किया जाता है, इस व्रत को करने से संतान की आयु लंबी होती है। इसके साथ ही माताएं अपनी संतान की कुशल उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है। मान्यताओं अनुसार जो भी इस व्रत को रखते हैं उनके संतान पर आने वाली सारी विपदा खत्म हो जाती है और उनका भाग्योदय होता है, विधि विधान से व्रत रखने से संतानहीन महिलाओं को संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है।
यह रहेगा शुभ योग
भारद्वाज ने बताया की व्रत वाले दिन कई शुभ योग बन रहे है जैसे की रवि पुष्य, सर्वार्थ सिद्धि व शुभ और शुक्ल योग का निर्माण हो रहा हैं, जो किसी भी मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत फलदाई माने गए है, इन योगों में किए गए शुभ कार्यों और व्रत उपवास का अनंत गुणा फल मिलता है। उन्होंने बताया कि अष्टमी के दिन व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए तारों को देखने का समय शाम 5.58 बजे से शुरू होगा, इस समय से तारों को देखकर अपना व्रत खोल सकती है।
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