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छह करोड़ रुपये देने का नाम ठगे 75 लाख 57 हजार रुपये

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नारनौल। जीवन बीमा पॉलिसी की परिपक्कव राशि दिलाने के नाम पर एक व्यक्ति से 75 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। पीड़ित ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक को देकर राशि वापस करवाने तथा ठगी करने लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। पीड़ित की शिकायत पर शहर थाना पुलिस ने चार के खिलाफ धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में गांव कादीपुरी (फैजलीपुर) निवासी हरपाल सिंह ने बताया कि गत दिसंबर माह में उसके मोबाइल पर एक नंबर से कॉल आया। जिसने अपना परिचय रुपल चंद्रा आईजीएमएस विभाग हैदराबाद में बतौर अधिकारी के रूप में देते हुए उसने एचडीएफसी बैंक में की गई जीवन बीमा पॉलिसी के बारे में बताया कि उसे 8 लाख रुपये मच्योरिटी राशि दी जानी है। उक्त पॉलिसी पर 8729 रुपये बतौर टैक्स बकाया है जिसके अदा करने पर उसे 8 लाख रुपये मच्योरिटी राशि जारी कर दी जाएगी। रूपल चंद्रा द्वारा पॉलिसी के बारे में जानकारी देने पर उसे उसके सरकारी अधिकारी का विश्वास हो गया। इस पर उसने रूपल चंद्रा द्वारा दिए गए अंकाउट नंबर में 8729 रुपये एक साइबर कैफे के मार्फत भुगतान कर दिया। जिसकी पेमेंट रसीद भी उसके व्हाट्सअप नंबर पर भेज दी। इसके बाद रुपल चंद्रा ने उससे कहा कि कुछ बीमा पॉलिसी की फाइलें उनके कार्यालय में है। जिनका टैक्स बकाया है परंतु पॉलिसी धारक टैक्स भरने में असमर्थ है। इसलिए अगर वह उन पालिसीयों का टैक्स का भुगतान कर दे तो उनका कुछ अमाउंट उसे मिल जाएगा उसने ऐसा करने से मना कर दिया। परंतु रूपल चंद्रा ने उसे बार-बार फोन करने पर उसने रुपल चंद्रा द्वारा बताए बैंक खाता नंबरों में कुल 30 76 522 रुपये दिसंबर और जनवरी माह में जमा करवाए। उसके बाद रुपल चंद्रा ने अपने मोबाइल नंबर बंद कर लिये। जिसके बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया। इसके बाद दूसरे नंबर से एक व्यक्ति ने उससे मोबाइल पर संपर्क किया और अपना नाम अजय अग्रवाल बताते अपने आप को ईडी विभाग का अधिकारी बताया। उसने कहा कि वह मुंबई में कार्यरत है। कहा कि आईजीएमएस हैदरबाद से उसकी इंश्योरेंश की फाइलें उनके पास आई है। जिनको हैदराबाद में रुपल चंद्रा डील कर रही थी। रुपल चंद्रा की शिकायत होने पर विभाग ने यह फाइलें उसके पास मुंबई भेजी हैं, क्योंकि रुपल चंद्रा द्वारा उससे पैसा ऐंठ लिया गया था तथा अब उसका फोन भी बंद आ रहा था। इसलिए उसे अजय अग्रवाल के अधिकारी होने का भरोसा हो गया। इसके बाद अजय अग्रवाल ने आईजीएमएस हैदराबाद से प्राप्त इंश्योरेंश फाइल के बारे बता कर कहा की यदि वह 1 लाख रुपये टैक्स का भुगतान कर दे तो उसे उन पॉलिसी का 6 करोड़ 75 लाख 24 हजार 900 रुपये प्राप्त हो जाएगा। मगर उसने पीड़ित ने पैसा देने से मना कर दिया। परंतु अजय अग्रवाल ने कहा कि वह भारत सरकार का अधिकारी है तथा उसका ऑफिस मुंबई में स्तिथ है जहां आकर वह सत्यापन कर सकता है। इस पर अजय अग्रवाल पर भरोसा कर लिया और 75 हजार 396 रुपये का भुगतान उसके द्वारा बताए गए बैंक खातों में कर दिया। इसके बाद अजय अग्रवाल ने कहा कि चूंकि 6 करोड़ 75 लाख 24 हजार 900 रुपये बहुत बड़ी राशि है इसलिए उसे अपने बैंक अकाउंट को सर्विवल अकाउंट में बदलना होगा जिसका खर्चा 5 लाख 40 हजार रुपये है जोकि उसने उनके बताये गए बैंक खातों में जमा करवाए। इसके बाद अजय अग्रवाल ने उससे 6 करोड़ 75 लाख 24 हजार 900 रुपये पर लगने वाला टैक्स भरने को कहा जोकि उसके बताए गए बैंक अकाउंट में जमा करवा दिया। इसी दौरान अजय अग्रवाल ने फोन कांफ्रेंस के जरिये एक व्यक्ति जिसकी पहचान मनीष मिश्रा के रूप में करवाई गई। जिसने अपने आप को वित्त मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली का अधिकारी बताया और कहा कि 6 करोड़ 75 लाख 24 हजार 900 रुपये पर 2 प्रतिशत केंद्रीय टैक्स भरना होगा। जिस पर उसने 15 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। इसके बाद अजय अग्रवाल ने उसे फोन पर सूचित किया कि उक्त राशि भुगतान पर केसी एजेंट द्वारा रोक लगवा दी गई है। जिसको हटवाने के लिए 13 लाख 50 हजार का खर्चा होगा। अजय अग्रवाल लगातार उससे फोन पर संपर्क कर रहे हैं। इस तरह रुपल चंद्रा, अजय अग्रवाल, मनीष मिश्रा व सुरभि अग्रवाल ने खुद को अधिकारी बताकर उससे धोखाधड़ी एवं छलपूर्वक 75 लाख 57 हजार 690 रुपये ठग लिए है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने उक्त लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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