नारनौल। हिंदी भाषा भारतीय संस्कृति और सभ्यता के विकास की सहयात्री रही है। यह केवल मातृभाषा नहीं, बल्कि गौरव का प्रतीक भी है। यह बात आजमाबाद मौखुता के राजकीय मॉडल संस्कृति विद्यालय के शिक्षक शिव बलाहा ने कही। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को हिंदी के विकास में योगदान के लिए प्रेरित करना सभी की जिम्मेदारी है। संवाद