महेंद्रगढ़। पिछले सप्ताह कनीना क्षेत्र के उन्हाणी गांव के पास हुए बस हादसे में घायल बच्चे स्वास्थ्य में सुधार होने पर अपने घर पहुंच चुके हैं। इन बच्चों और इनके परिजनों ने हादसे के बाद स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। इनका कहना है कि जिले के सरकारी अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। यदि जिले में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं होती तो कुछ जानें और बच सकती थीं। 11 अप्रैल को हुए सड़क हादसे में 34 बच्चे घायल हो गए थे। इनमें से छह बच्चों की मौत हो गई थी।
हादसे के बाद 12 बच्चों को रेवाड़ी के निजी अस्पतालों में भेजा गया था, जबकि तीन बच्चों को गंभीर हालत होने के चलते रेवाड़ी से भी गुरुग्राम रेफर कर दिया गया था। हादसे के महज आधे घंटे बाद ही कनीना स्थित उप नागरिक अस्पताल में उपचार के लिए जब बच्चों को पहुंचाया गया तो चिकित्सकों ने सुविधाओं के अभाव में हाथ खड़े कर दिए थे।
अधिकतर घायल बच्चों को कनीना के ही एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से उपचार के बाद कुछ को मामूली चोटें होने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया था। इस दौरान अभिभावकों व बच्चों ने क्षेत्र में मिलने वाली सुविधाओं पर काफी सवाल खड़े किए।
हादसे में मृत रिक्की के पिता रविंद्र बोले- क्षेत्र में नहीं बेहतर चिकित्सा सुविधाएं
कक्षा आठवीं में पढ़ने वाले 12 वर्षीय रिक्की की हादसे में जान चली गई थी। रिक्की के पिता धनौंदा निवासी रविंद्र सिंह ने बताया कि हादसे के महज आधे घंटे में ही घायल बच्चों को उप नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ पहुंचाया गया था, लेकिन वहां चिकित्सकों ने पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में हाथ खड़े कर दिए थे। चिकित्सकों ने ही स्वयं अन्य अस्पतालों में ले जाने की बात कहते हुए अधिकतर गंभीर रूप से घायल बच्चों को रेफर कर दिया। अगर यहां बेहतर सुविधाएं होती तो कुछ मासूमों की जानें और बच सकती थीं।
सुविधाओं के अभाव में किया गया रेफर : छात्रा अंजू
हादसे में घायल कक्षा 12वीं की छात्रा अंजू ने बताया कि उप नागरिक अस्पताल में इतना बड़ा भवन व पर्याप्त चिकित्सक होने के बावजूद सुविधाएं नहीं होने के कारण घायलों को महज प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया जा रहा था। अस्पताल में चिकित्सक हैं, लेकिन उपकरणों एवं तकनीकि सुविधाओं का अभाव है। उपकरण एवं सुविधाओं के अभाव में चिकित्सकों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। अगर शीघ्रता से यहीं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलती तो और जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।