फोटो संख्या: 71 गांव पाल में कथा का रसपान करवाते हुए कुलदीप शास्त्री--संवाद
महेंद्रगढ़। गांव पाल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन श्रद्धालुओं को कथा सुनाई गई। कथावाचक कुलदीप शास्त्री ने कहा कि भगवान दत्तात्रेय ने अनुभव सिद्ध बात कही है की आनंद बाहर के विषयों में नहीं ह्रदय के अंतर है। दीक्षा गुरु एक होता है किंतु शिक्षा गुरु अनेक हो सकते हैं। भगवान दत्तात्रेय ने अपने 24 गुरुओं जैसे धरती, वायु, आकाश, जल, अग्नि चंद्रमा, सूर्य, कबूतर, अजगर, समुद्र, पतंगा, भ्रमर, हाथी, मधुमक्खी आदि से भी शिक्षा ली है। उन्होंने रामायण की चौपाई के माध्यम से कहा सत्संग से मनुष्य ही क्या पशु पक्षी तक का जीवन सुधरता है।
आचार्य ने श्रीमद्भागवत कथा का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह ऐसी दिव्या रसभरी पावन कथा है जिससे आनंद की प्राप्ति होती है। उन्होंने श्रीमद्भागवत को भगवान से मिलने मिलाने का साधन बताया और कहा की संसार के विषय सुखों से धीरे-धीरे विरक्ति और प्रभु के प्रति प्रेम का बढ़ना यही भागवत कथा की लीला का उद्देश्य है। जब भी घर से बाहर निकलो ठाकुरजी की वंदना करके निकलो, ईश्वर केवल प्रेम चाहते हैं और प्रेम ही देते हैं।