फोटो 8 महता चौक पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु।स्त्रोत: आयोजक
नारनौल। नारनौल के महता चौक स्थित कुटुंब पैलेस में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन श्रीकृष्ण-सुदाम का प्रसंग सुनाया गया। कथा के अंत में वृंदावन की प्रसिद्ध फूलों की होली खेली गई।
आचार्य बजरंग शास्त्री ने भागवत कथा में बताया कि भगवान भक्तो के भाव को देखते हैं, भाव के बिना वो किसी भी वस्तु को ग्रहण नही करते हैं। आचार्य ने गोपी उद्धव संवाद का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि गोपियों का प्रेम सांसारिक प्रेम नही था। उन्होंने बताया कि मनुष्य को निस्वार्थ भक्ति करनी चाहिए। विश्राम दिवस कि कथा में आचार्य ने कृष्ण भगवान के 16108 विवाह का भी वर्णन किया। व्यास ने कृष्ण सुदामा चरित्र का बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जैसी मित्रता कृष्ण और सुदामा ने निभाई वैसी ही हमें भी मित्रता निभानी चाहिए। उसके बाद भागवत की और शुकदेव की विदाई हुई। इस अवसर पर मुख्य यजमान अरुण शर्मा, टीना शर्मा, ओमप्रकाश यादव, वैद्य किशन वशिष्ठ, कृष्ण शर्मा, सुरेश शर्मा, पवन शर्मा आदि मौजूद रहे।