सतनाली। गांव नांगल माला में श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के सातवें दिन श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता की कथा सुनाई। कालीदास महाराज ने बताया मित्र हमारे सुख-दुख के साथी होते हैं। इन्हीं में से एक कृष्ण और सुदामा की कहानी है। इससे हमें मित्र के प्रति ईमानदारी, त्याग और सम्मान का भाव दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि जब कभी मित्रता की बात होती है तो कृष्ण और सुदामा की मिसाल दी जाती है। इस दौरान कालीदास महाराज ने बताया कि जब कृष्ण बालपन में ऋषि संदीपन के यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे थे तो उनकी मित्रता सुदामा से हुई थी। कृष्ण एक राजपरिवार में और सुदामा ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए थे। परंतु दोनों की मित्रता का गुणगान पूरी दुनिया करती है। शिक्षा-दीक्षा समाप्त होने के बाद भगवान कृष्ण राजा बन गए वहीं दूसरी तरफ सुदामा के बुरे दौर की शुरुआत हो चुकी थी। बुरे दिन से परेशान होकर सुदामा की पत्नी ने उन्हें राजा कृष्ण से मिलने जाने के लिए कहा। पत्नी के जिद्द को मानकर सुदामा अपने बाल सखा कृष्ण से मिलने द्वारिका गए। जब राजा कृष्ण अपने मित्र सुदामा के आने का संदेश पाकर कृष्ण नंगे पैर ही उन्हें लेने के लिए दौड़ पड़ते हैं। मित्र सुदामा की दयनीय हालत देखकर भगवान कृष्ण के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। भगवान कृष्ण ने मित्र सुदामा का पैर अपने आंसुओं से धूल दिया। यह घटना भगवान कृष्ण का अपने मित्र सुदामा के प्रति अनन्य प्रेम को दर्शाता है। इसीलिए कृष्ण और सुदामा की दोस्ती की मिसाल दी जाती है। उन्होंने बताया कि रविवार को कथा के समापन पर हवन व भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।