फोटो संख्या:52-विद्यार्थियों को संबोधित करते विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार शर्मा--स्रोत- हकेंवि
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) महेंद्रगढ़ के राजनीतिक विज्ञान विभाग की ओर बुधवार को भारत की विदेश नीति के बदलते आयाम पर केंद्रित विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।
आयोजन में राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के डॉ. राजेश कुमार शर्मा मुख्य व्याख्याकर्ता के रूप में उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने अपने संदेश में भारत की विदेश नीति के बदलते परिदृश्य एवं दुनिया में भारत की मजबूत होती साख का उल्लेख किया। इसी क्रम में विश्वविद्यालय की समकुलपति प्रो. सुषमा यादव ने विद्यार्थियों का ध्यान भारत की विदेश नीति की महत्ता और उसके अध्ययन की ओर आकर्षित किया।
कार्यक्रम विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में भारत की विदेश नीति विश्व मंच पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की अपनी आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करती है। भारत की विदेश नीति में अमेरिका, चीन और रूस के साथ संबंध केंद्रीय हैं। भारत ने समान विचारधारा वाले राष्ट्रों के साथ संबंधों को मजबूत करने और आर्थिक साझेदारियों को विविधिता देने की नीति अपनाई है।
उन्होंने कहा कि ’पूर्व की ओर कार्य करो’ की नीति पर चलते हुए भारत ने दक्षिण पूर्वी एशियाई और पूर्व एशियाई देशों के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। भारत हिन्द-प्रशांत रणनीति के माध्यम से एक खुले और समावेशी क्षेत्र की वकालत करता है जिसके द्वारा भारत सम्प्रभुता और अन्तरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि आर्थिक कूटनीति भी भारत के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण रही है। इसके चलते महामारी के बाद आर्थिक पुनरुद्धार और आर्थिक श्रंखलाओं के विविधिकरण ने भारत को मेक इन इंडिया जैसी पहलों के साथ एक विनिर्माण केंद्र के रूप में विस्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया है। विभिन्न चुनौतियों के बावजूद भारत आज बहुआयामी दृष्टिकोण के कारण उभरती हुई शक्ति के रूप में, वैश्विक शांति, सुरक्षा और समृद्धि में योगदान करने और एक अधिक समावेशी विश्व व्यवस्था की वकालत करने की स्थिति में है।