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Mahendragarh-Narnaul News: हकेंवि का कमाल, कबाड़ से तैयार कर दिया इलेक्ट्रिक स्कूटर

Mon, 05 Jun 2023 12:41 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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फोटो संख्या:54-इलेक्ट्रिक स्कूटर मित्रा का अवलोकन करते कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार---संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों व शिक्षकों की टीम ने एक ऐसा इलेक्ट्रिक स्कूटर तैयार किया है, जो एक बार चार्ज करने पर 70 किलोमीटर का सफर तय कर सकता है। लैपटाॅप की बैटरी से चलने वाले थ्री सीटर इलेक्ट्रिक स्कूटर को मात्र एक घंटा दस मिनट में किसी भी सामान्य इलेक्ट्रिक प्लग से चार्ज किया जा सकता है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि आज के समय में जब पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार प्रयास जारी है, आवश्यक है कि हम ऐसे इनोवेशन करें, जोकि प्रदूषण की समस्या के निदान में मददगार हो। विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी विभाग के शिक्षकों व विद्यार्थियों द्वारा तैयार इलेक्ट्रिक स्कूटर मित्रा ऐसा ही एक प्रयास है। कुलपति ने कहा कि हमारे स्कूटर से 25 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से एक बार में तीन व्यक्ति एक साथ यात्रा कर सकते हैं। मात्र 21 हजार रुपये की लागत में मैटीरियल से तैयार यह स्कूटर पर्यावरण हितैषी है।
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इस टीम ने किया तैयार
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थी अभिषेक शर्मा, आदर्श तिवारी, भुख्या वामशी, मुज्जखीर अली खान, फैजान अशरफ और शिक्षक डॉ. मुरलीधर नायक भुख्या व डॉ. सुधीर कुमार आदि की टीम ने इस स्कूटर को तैयार किया है। इलेक्ट्रिक स्कूटर के संबंध में आवश्यक पेंटेंट आदि की प्रक्रिया विश्वविद्यालय के स्तर पर आरंभ कर दी गई है। डॉ. मुरलीधर नायक भुख्या ने इसके लिए कुलपति प्रो टंकेश्वर कुमार, डीन प्रो. फूल सिंह, विभाग के शिक्षक प्रो. अजय बंसल और विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार दुबे का उनके सहयोग व मार्गदर्शन के लिए आभार जताया।
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इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर तैयार किया जाए तो लागत होगी और कम
डॉ. मुरलीधर ने बताया कि मित्रा स्कूटर पर्यावरण का मित्र है। टीम के अन्य सदस्य डॉ. सुधीर बताते है कि इस स्कूटर को यदि इंडस्ट्री के स्तर पर बड़े पैमाने पर तैयार किया जाता है तो इसकी लागत को और कम कर पाना संभव होगा और इसके माध्यम से भारी संख्या में उपलब्ध वेस्ट मैटीरियल को भी उपयोग में लाया जा सकता है। स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. फूल सिंह ने शिक्षकों व विद्यार्थियों की इस खोज पर खुशी जताई है।
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