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महेंद्रगढ़ में गहराया भूजल संकट: नहरी पानी नहीं मिलने से अगले 20 साल में खेती करना होगा मुश्किल, लोग परेशान

Thu, 01 Jun 2023 01:03 PM IST
नवीन दलाल मनोज सिंह, महेंद्रगढ़ (हरियाणा)

सार

महेंद्रगढ़ में हर साल औसतन पांच फीट भूजल स्तर गिर रहा है। जिसके कारण खेती व पेयजल के लिए किसान आठ से दस बार बोर कराने के बावजूद भी पानी के लिए लाचार हैं। इसी कारण महेंद्रगढ़ के आठ खंडों में पांच को डार्क जोन में शामिल किया है। वहीं जिले के 50 प्रतिशत बोरवेल महज दस सालों में ठप हो गए हैं।
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पानी के लिए बोरवेल करते किसान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महेंद्रगढ़ जिले में पिछले एक दशक में औसतन 5 फुट प्रतिवर्ष की दर से भूजल स्तर गहराई में गया है। जिले के आठ खंडों में से पांच खंडों को डार्क जोन में शामिल किया जा चुका है। पिछले दस सालों के दौरान जिले के 50 प्रतिशत बोरवेल ठप्प हो चुके हैं। जिले के चार गांवों में भूजल स्तर 300 फुट से अधिक गहराई तक पहुंच गया है।

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पांच खंड डार्क जोन में शामिल
वर्ष 2020 में जिले को लगातार घट रहे भूजल स्तर की स्थिति को ध्यान में रखते हुए डार्क जोन में शामिल किया गया था। वहीं वर्ष 2019 में सरकार द्वारा वाटर सैल का गठन किया गया था जिसमें किसानों को ट्यूबवेल के लिए बिजली कनेक्शन भी शर्तों के आधार पर दिए गए थे। वहीं अटल भूजल योजना के तहत जिले के नारनौल, अटेली, नांगल चौधरी, महेंद्रगढ़ व कनीना खंडों को डार्क जोन में शामिल किया गया है।

यह है जिला में भूजल की स्थिति
खंड का नाम भूजल फुट की गहराई में

अटेली             242 फुट
कनीना             105
महेंद्रगढ़             165
सतनाली             219
नांगल चौधरी        149
निजामपुर             107
सिहमा                 130
नारनौल                158

लगातार गिरते भूजल स्तर का यह रहा मुख्य कारण

जिले में लगातार भूजल स्तर की स्थिति बिगड़ती जा रही है। सतनाली क्षेत्र में तो हालात ऐसे हैं कि एक-एक किसान खेती के लिए आठ से दस बार लाखों रुपये खर्च कर बोरवेल करा रहे हैं लेकिन खेती का पानी तो दूर पेयजल भी नसीब नहीं हो पा रहा है। इस समय सतनाली क्षेत्र में 1200 से 1500 फुट तक गहराई में भी पानी नहीं है। ऐसे में किसान खेती करना तो दूर आगामी 20 सालों में पेयजल भी नसीब नहीं हो पाएगा। वहीं जिले के गांव सतनाली में भूजल स्तर 300 फुट, निहालावास में 367 फुट, कुलताजपुर में 318 फुट व खोड़मा में 315 फुट गहराई में भूजल स्तर पहुंच चुका है।

नहरी पानी का अभाव

जिला में नहरी पानी के नाम पर महज जेएनएल ही एकमात्र सहारा है। लेकिन पिछले दस सालों के दौरान नहरों को भी सीमेंटेड किया जा चुका है जिसके कारण भूमि में पानी का रिसाव नहीं होने के कारण हालात लगातार खराब होते गए। वहीं प्रदेश सरकारों द्वारा भी 40 वर्ष पुरानी मैपिंग के आधार पर नहरी पानी की आपूर्ति की जा रही है। इस दौरान अनेक जिलों में सेम, कृषि योग्य भूमि, ओद्यौगिक क्षेत्र, रिहायशी क्षेत्र में बड़े स्तर पर बदलाव हुए हैं और पानी पुरानी मैपिंग के आधार पर दिया जा रहा है। यह सबसे बड़ी समस्या महेंद्रगढ़ जिले के साथ रही है।
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कहने को भूजल स्तर कम लेकिन 1500 फुट तक गहराई में भी नहीं

कहने को तो सतनाली क्षेत्र का भूजल स्तर 300 फुट गहराई में है लेकिन यहां कृषि योग्य पानी बोरवेल के माध्यम से भूमि से बाहर खींचने के लिए 1500 फुट तक गहराई में भी पर्याप्त पानी नहीं है जिससे बोरवेल की मोटर चल सके। यही स्थिति पूरे जिले की है भूजल स्तर एवं कृषि तथा पीने योग्य पानी तो जिलेभर में 400 फुट से अधिक की गहराई में ही नसीब हो पाता है।
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