जिले में लगातार भूजल स्तर की स्थिति बिगड़ती जा रही है। सतनाली क्षेत्र में तो हालात ऐसे हैं कि एक-एक किसान खेती के लिए आठ से दस बार लाखों रुपये खर्च कर बोरवेल करा रहे हैं लेकिन खेती का पानी तो दूर पेयजल भी नसीब नहीं हो पा रहा है। इस समय सतनाली क्षेत्र में 1200 से 1500 फुट तक गहराई में भी पानी नहीं है। ऐसे में किसान खेती करना तो दूर आगामी 20 सालों में पेयजल भी नसीब नहीं हो पाएगा। वहीं जिले के गांव सतनाली में भूजल स्तर 300 फुट, निहालावास में 367 फुट, कुलताजपुर में 318 फुट व खोड़मा में 315 फुट गहराई में भूजल स्तर पहुंच चुका है।
जिला में नहरी पानी के नाम पर महज जेएनएल ही एकमात्र सहारा है। लेकिन पिछले दस सालों के दौरान नहरों को भी सीमेंटेड किया जा चुका है जिसके कारण भूमि में पानी का रिसाव नहीं होने के कारण हालात लगातार खराब होते गए। वहीं प्रदेश सरकारों द्वारा भी 40 वर्ष पुरानी मैपिंग के आधार पर नहरी पानी की आपूर्ति की जा रही है। इस दौरान अनेक जिलों में सेम, कृषि योग्य भूमि, ओद्यौगिक क्षेत्र, रिहायशी क्षेत्र में बड़े स्तर पर बदलाव हुए हैं और पानी पुरानी मैपिंग के आधार पर दिया जा रहा है। यह सबसे बड़ी समस्या महेंद्रगढ़ जिले के साथ रही है।
कहने को तो सतनाली क्षेत्र का भूजल स्तर 300 फुट गहराई में है लेकिन यहां कृषि योग्य पानी बोरवेल के माध्यम से भूमि से बाहर खींचने के लिए 1500 फुट तक गहराई में भी पर्याप्त पानी नहीं है जिससे बोरवेल की मोटर चल सके। यही स्थिति पूरे जिले की है भूजल स्तर एवं कृषि तथा पीने योग्य पानी तो जिलेभर में 400 फुट से अधिक की गहराई में ही नसीब हो पाता है।