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Mahendragarh-Narnaul News: सुविधाओं के अभाव में अनाज मंडी

Thu, 14 Mar 2024 01:48 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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महेंद्रगढ़। वर्ष 1938 में पटियाला रियासत के समय बनी महेंद्रगढ़ की अनाज मंडी में 86 साल बाद भी टीनशेड नहीं लगा है। मंडी में करीब 72 दुकानें, 45 रजिस्टर्ड फर्म हैं।
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हर साल सीजन के समय बारिश होने पर किसानों की खुले में पड़ी उपज पर भीगने का खतरा रहता है। कई बार ऐसा हो चुका है कि बारिश के कारण बड़े स्तर पर उपज भीगकर खराब होने का संकट बना है। 104 गांवों के किसानों की उपज महेंद्रगढ़ की मंडी में बिक्री होती है। मार्केट कमेटी के जिम्मेदारों की ओर से मंडी में न ही तो नियमित रूप से सफाई कराई जा रही है और न ही फड़ों पर पड़ा मलबा उठाया जा रहा है।
अतिक्रमण एवं मलबे से पटी पड़ी है कॉमन फड़
मंडी की फड़ें मलबे व निजी सामान से अंटी पड़ी हैं। करीब आठ एकड़ में फैली यह इस मंडी में अव्यवस्था बनी हुई है। 180 गुणा 360 फुट की कॉमन फड़ पर किसानों की उपज को बारिश से बचाने के लिए टीनशेड तक नहीं हैं। वहीं जमीन से सटाकर पोल पर लगाए गए मीटर बॉक्स से मंडी में कभी भी हादसे हो सकते हैं। मंडी के दोनों ओर जिम्मेदारों की ओर से गेट लगाने के लिए कॉलम तो बना दिए, लेकिन चार माह से गेट तक नहीं चढ़ा पाए हैं।
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बीच में बनी रोड वह भी उखड़ने लगी
वर्ष 1980 के बाद मंडी के चारों तरफ बनी सड़कों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। वेयर हाउस व मंडी के चारों ओर से सड़कें बदहाल हो चुकी हैं। जिम्मेदारों से बार-बार मांग के बावजूद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हालांकि छह माह पूर्व आरसीसी बेस पर मंडी के बीच में बनी सड़कों से रोड़ियां उखड़ने लगी हैं। इसकी जांच की मांग की गई थी, जिसके बाद पंचकुला से इंजीनियरों की टीम ने सैंपल लिए थे।
-बिजेंद्र सिंह, अनाज मंडी प्रधान महेंद्रगढ़।
पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं
हाल ही में मंडी के बीच के सड़क तो बना दिए गए लेकिन पानी निकासी के लिए कोई व्यवस्था तक नहीं की। अब बारिश के दिनों में व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। जब निर्माण चल रहा था तो मांग भी की थी कि पानी निकासी की व्यवस्था की जाए, लेकिन महज नालियां बना दी जो गंदगी से अंटी पड़ी रहती हैं।
-धन्नाराम मित्तल, प्रमुख व्यापारी
नियमित रूप से नहीं होती सफाई
मंडी में बार-बार कहने के बावजूद भी मार्केट कमेटी की ओर से नियमित रूप से सफाई नहीं कराई जा रही है। जगह-जगड़ पड़े मलबे के ढेरों से फड़ों पर जगह का अभाव बना हुआ है। प्रदेश की प्रत्येक सरकारी मंडी में सरकारी धर्मकांटा है, लेकिन महेंद्रगढ़ की एकमात्र मंडी है जिसमें सरकारी धर्मकांटा नहीं है।
-विनय मित्तल, व्यापारी
किसान भवन ना कोई सुविधा
प्रदेश की अधिकांश मंडियों में किसान भवन हैं, लेकिन यहां किसानों के लिए सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। मंडी की बाहरी सड़कें बदहाल हैं। लटकते बिजली के तार से हादसे का खतरा बना रहता है। एक सुलभ शौचालय है उसकी भी नियमित रूप से सफाई नहीं होती। हर वर्ष टीनशेड की मांग को लेकर व्यापारी व किसान मंत्रियों से लेकर विधायकों व अधिकारियों तक गुहार लगाते हैं, लेकिन यह मांग पूरी नहीं हुई।
-कपिल तायल, सचिव अनाज मंडी महेंद्रगढ़।
समय रहते मंडी में साफ-सफाई एवं बिजली, पानी की व्यवस्था करा दी जाएगी। जल्द ही फड़ों पर जिन व्यापारियों का सामान पड़ा है उन्हें सामान हटाने के लिए नोटिस दिया जाएगा। इसके अलावा मंडी गेटों के लिए काम चल रहा है जल्द ही पूरा किया जाएगा। मंडी में टीनशेड के लिए जगह पर्याप्त नहीं है, हालांकि टीनशेड के लिए उनकी तरफ से प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है।
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-नरेंद्र यादव, सचिव मार्केट कमेटी महेंद्रगढ़।
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