भले प्रदेश सरकार अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा कर रही हो लेकिन हकीकत यह है कि जिले के नागरिक अस्पताल में दर्दनाशक व एंटीबॉयोटिक आदि दवाइयां नहीं है। इसको लेकर सोमवार को टीम ने नारनौल के नागरिक अस्पताल का दौरा किया तो सामने आया की चिकित्सकों की लिखी दवाइयों में से कुछ ही मरीजों को अस्पताल में मिल रही हैं। अन्य दवाइयां मरीजों को अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर से पैसे देकर लेनी पड़ी रही थीं। सरकार की ओर से अस्पतालों में अलग-अलग रोगों की लगभग 320 दवाइयां निर्धारित की हुई हैं। इनमें लगभग 120 दवाइयां उपलब्ध हो पाती हैं। इनमें से भी बहुत सी दवाइयां बहुत बार नहीं मिलती हैं।
ऐसे में सरकार की आमजन के लिए चलाई जा रही नि:शुल्क दवा और स्वास्थ्य जांच योजना दम तोड़ती दिखाई दे रही है।
बता दें कि सरकार नागरिक अस्पताल को दवाइयां खरीदने का बजट जारी करती है। छह-छह महीने में दो बार बजट जारी होता है ताकि दवाइयां खत्म होने पर खरीदी जा सकें और मरीजों को परेशानी न हो। नागरिक अस्पताल नारनौल का बजट छह महीने का 50 लाख रुपये का होता है लेकिन उन्हें 25 लाख रुपये ही मिलते हैं। 25 लाख रुपये से जच्चा बच्चा वार्ड, आपातकालीन वार्ड, बच्चों का वार्ड आदि वार्डों की दवाइयां आती हैं। ओपीडी के दौरान मरीजों को दी जाने वाली दवाइयां का बजट कम ही रहता है। राज्य सरकार ने प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर दवाइयों के स्टॉक के लिए वेयर हाउस बनाया है। स्वास्थ्य मंत्रालय चंडीगढ़ से दवाइयां खरीदकर वेयरहाउस में भेज देते हैं। वेयरहाउस के अंदर दवाइयों की उपलब्धता ऑनलाइन चढ़ा दी जाती है। जिन पीएचसी, सीएचसी, उप नागरिक अस्पताल व नागरिक अस्पताल सहित अन्य अस्पताल के इंचार्ज वेयरहाउस भिवानी से मंगवा सकते हैं। अगर वेयर हाउस में दवाइयां नहीं होती तो सरकार अस्पताल को दवाइयां खरीदने का बजट देती है। उस बजट से जो दवाइयां कम होती हैं वह खरीदनी होती है।
तीन वर्षों से अस्पताल के अंदर बच्चों को बुखार होने पर दी जाने वाली पैरासिप नहीं है। इसके अलावा दर्द की आईब्रूप्रोफेन, एंटी बायोटिक डिक्लो, डिक्लोपैरा भी नहीं है। बड़ों के लिए एंटी बॉयोटिक अमोक्सी, अमोक्सीनसिलिव, डोक्सीसाइक्लीन आदि दवाइयां भी खत्म हैं। दर्द होने पर लगाने वाली डिक्लो जैल व गर्म पट्टी भी नहीं है।
नागरिक अस्पताल में कुछ दवाइयों की कमी है जिसको जल्द पूरा किया जाएगा। नागरिक अस्पताल में आने वाले लोगों को बेहतरीन सुविधा मिले इसके लिए हमेशा प्रयासरत रहते हैं। -डॉ. केएम शर्मा, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट नागरिक अस्पताल, नारनौल।