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अक्तूबर 1990 में कार सेवा पर जाना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण कार्य था: कैलाश पाली

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महेंद्रगढ़। अक्तूबर 1990 में कार सेवा पर जाना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। उत्तर प्रदेश की सरकार ने समाज में एक भय का वातावरण बना दिया था। कार सेवकों को गोलियों से भून दिए जाने की धमकिया दी जा रही थी।
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उन्होंने अयोध्या के 50 किलोमीटर के दायरे में पुलिस बल तैनात करके कार सेवकों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन राम मंदिर का संकल्प लिए लाखों कार सेवक पूरे देश से समाज के सभी वर्गों से अयोध्या के लिए निकल पड़े और गोलियों के बीच कार सेवा करके मंदिर बनाने का संकल्प लिया। जो आज पूरा हो रहा है। गांव पाली में अयोध्या से आए पूजित अक्षत राम मंदिर का चित्र और पत्रक लेकर खंड पालक भवानी सिंह और गांव ग्राम संयोजक अमन भारद्वाज के साथ गांव से 1990 की कार सेवा में जाने वाले स्वर्गीय हनुमान यादव, स्वर्गीय विजयपाल सिंह और स्वर्गीय बहादुर सिंह के परिवारों को अयोध्या जाने का निमंत्रण देते हुए उस कार सेवा में उनके साथ जाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश पाली ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि कार सेवकों के लहू से सरयू का रंग लाल हो गया। लेकिन संकल्प पूरा करने के लिए सभी लोग जय श्री राम का नारा लगाते हुए आगे बढ़ते गए। सरकार ने कार सेवकों के शरीर को गोलियों से छलनी कर दिया। लेकिन कार सेवा का संकल्प पूरा हुआ। जो सपना हिंदू समाज ने सदियों पहले देखा था। उनके स्वप्न स्वरूप बना यह मंदिर हम अवश्य देखने जाए और भगवान का का आशीर्वाद प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि भारत का बच्चा-बच्चा राम मंदिर बनने से उत्साह में है। राम भक्तों की टोलिया घर-घर जाकर आने वाले समय में समाज को अयोध्या जाने का निमंत्रण दे रही हैं
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