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समूचे विश्व को जीवन जीने की राह दिखाने वाला ग्रंथ है गीता : प्रो. मार्कंडेय

Fri, 10 May 2024 04:07 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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फोटो संख्या:71- हकेंवि में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमा
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महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) में वीरवार को भारतीय ज्ञान परंपरा में श्रीमद्भागवत गीता विषय पर केंद्रित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
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मुख्य वक्ता डॉ. मार्कंडेय आहूजा ने अपने वक्तव्य में कहा कि गीता के 18 अध्याय और 700 श्लोक हमारे जीवन के आधार स्तंभ है। समूचे विश्व को जीवन जीने की राह दिखाने वाला ग्रंथ है गीता। बाल गंगाधर तिलक, भगत सिंह, बंकिम चंद्र चटर्जी ने भागवत गीता का पाठ किया व उन्होंने गीता के द्वारा राष्ट्रीय क्रांति में अपना योगदान दिया।
वक्ता ने अपने संबोधन में मनोवृत्ति, साहस, संप्रेषण, बदलाव, दृढ़ता, समानता, लक्ष्य केंद्रित रहने की सीख प्रतिभागियों को दी। विद्यार्थियों के लिए उन्होंने गीता को आत्मक्रांति का माध्यम बताया, जिसके जरिए वे समाज, देश व दुनिया की बेहतरी का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। गीता हमें उत्तम गुरु के चयन का भी मार्ग दिखाती है। यदि हमें जीवन में योग्य गुरु प्राप्त होता है तो सफलता मुश्किल नहीं है। गीता के कारण ही महाभारत का युद्ध अन्य सभी युद्धों से अलग है।गीता विदेश की धरती पर पहुंची और जन-जन के लिए कल्याणकारी बनी। गीता हमें अपनी शक्ति से परिचय कराती है।
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विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी में बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय रोहतक व गुरुग्राम विश्वविद्यालय गुरुग्राम के पूर्व कुलपति प्रो. मार्कंडेय आहूजा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने की।
कुलपति ने अपने संबोधन में गुरु की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि गीता हमें उत्तम गुरु के चयन का भी मार्ग दिखाती है। कुलपति ने इस मौके पर मनोवृत्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतिभा की कमी नहीं है, बशर्तें उसका सर्वोत्तम उपयोग करने का हुनर हो। प्रो. टंकेश्वर कुमार ने सभी प्रतिभागियों को अपने इतिहास पर गर्व कर आगे बढ़ने और भविष्य का मार्ग प्रशस्त करने के लिए प्रेरित किया।
हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. बीरपाल सिंह यादव ने कहा कि गीता हमारे पाठ्यक्रम में ही सम्मिलित है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. कामराज सिंधु ने कहा गीता के द्वारा ही मनुष्य कर्तव्य निष्ठ होकर अपने मार्ग पर चल सकता है। कार्यक्रम के अंत में हिंदी विभाग की सहआचार्य डॉ. कमलेश कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रो. नंद किशोर, प्रो. अंतरेश कुमार, डॉ. दिनेश कुमार, प्रो. दिनेश चहल, डॉ. अशोक कुमार व डॉ. सिद्धार्थ शंकर राय सहित विद्यार्थी, शोधार्थी उपस्थित रहे।

फोटो संख्या:71- हकेंवि में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमा

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