महेंद्रगढ़। अयोध्या में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर शहर से लेकर गांवों तक उत्साह के साथ पर्व के रूप में मनाया गया। क्षेत्र के 160 गांवों के 500 से अधिक मंदिरों में धूमधाम से पर्व मनाया गया। शहर के हुड्डा पार्क में 101101 दीप प्रज्ज्वलित कर शहरवासियों ने हुड्डा पार्क को ही अयोध्या का रूप दे दिया। पूरे शहर से पीले वस्त्रों में सजकर महिलाओं की टोलियां गीत, भजन व डीजे के साथ पार्क में पहुंची। शहर की प्राचीन श्रीरामलीला परिषद से 600 महिलाओं ने पार्क तक भव्य कलश यात्रा निकाली।
श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पूरे शहर में 20 से अधिक स्थानों पर स्वागत द्वारा बनाए गए। शहर में 50 से अधिक स्थानों पर भंडारे व प्रसाद का वितरण किया गया। शहर में पांच स्थानों पर बड़ी स्क्रीन लगाकर अयोध्या से प्राण प्रतिष्ठा का लाइव कार्यक्रम दिखाया गया।
13 क्विंटल तेल का 101101 दीपों को हुआ प्रयोग
शहर के हुड्डा पार्क में 101101 दीपों में 110 डब्बों में सरसों के तेल को एकत्रित किया गया। पूरे शहर के प्रत्येक मोहल्ले वार्ड व गलियों से प्रत्येक घर-परिवार के लोगों ने इस आयोजन में भाग लिया तथा दीप, रंगोली की सजावट की गई। पूरे शहर को श्रीराम ध्वजा व गुब्बारों से सजाया गया। श्रीरामलीला परिषद की ओर से परिषद प्रांगण से शुरू की गई भव्य यात्रा में श्रीराम परिवार की झांकियां भी महिलाओं के साथ रही। जगह-जगह लोगों की ओर से यात्रा का स्वागत किया गया।
सुबह चार बजे से ही मंदिरों में हुए धार्मिक अनुष्ठान शुरू
अयोध्या में श्रीरामलला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के आयोजन को लेकर पिछले दो माह से की जा रही तैयारियां का भव्य रूप 22 जनवरी को देखने को मिला। प्रत्येक गांवों के मंदिरों को भी भव्य रूप से सजाया गया था। सुबह से श्रीराम धुन सुनाई देने लगी थी। शहर के प्रत्येक मोहल्ले से महिलाएं सजधज कर हुड्डा पार्क में पहुंची। सुंदर रंगोलियों व दीप सज्जा देखने योग्य थी। आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा की हुड्डा पार्क को ही अयोध्या जैसा सजा दिया। पूरे शहर के मुख्य बाजारों व प्रतिष्ठानों पर श्रीराम ध्वजा सजी हुई थी। टोलियों से आतिशबाजी भी की।
160 गांवों के 500 से अधिक मंदिरों में हुए भव्य आयोजन
क्षेत्र के 160 गांवों के मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से लोगों द्वारा इस पर्व को यादगार बनाया गया। गांवों में कलश यात्रा निकालकर अपने मंदिरों तक पहुंचकर हवन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। शाम के समय लोगों ने भी घरों को दिवाली की तरह दीपों से सजाया। गांवों के मंदिरों में सुबह हवन, हनुमान चालीसा, आरती की गई।