नारनौल। पिछले कुछ दिनों से सरकारी अस्पताल गर्भवती महिलाओं को रेफर करने के मामले को लेकर निशाने पर है। लोग वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं। इसकी एक बानगी सोमवार को सरकारी अस्पताल में एनएचएम (नेशनल हेल्थ मिशन) के तहत निरीक्षण करने पहुंची पांच सदस्यीय टीम के सामने देखने को भी मिली।
पांच सदस्यीय टीम ने गायनी वार्ड, बच्चों की ओपीडी, एसएनसीयू का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम के सदस्यों ने गायनी वार्ड के नर्सिंग रूम में जब दाखिल मरीजों की फाइल मांगी तो उस पर किसी प्रकार का कोई रिकाॅर्ड नहीं चढ़ाया गया था। न तो उसमें दवा की जानकारी थी और न ही दिन भर में दिए गए भोजन से संबंधित कोई जानकारी थी। जब स्टाफ से जवाब मांगा गया तो कहा गया कि महिलाओं को छुट्टी मिलने पर पूरी जानकारी भर दी जाती है। इस पर टीम ने कहा कि जब रिकाॅर्ड नहीं चढ़ा गया तो अगली शिफ्ट में आने वाले स्टाफ को कैसे पता होगा कि आपने मरीज को क्या दवा और क्या भोजन दिया है। इस पर स्टाफ के पास कोई जवाब नहीं था। वहां मौजूद मेडिकल सुपरिंटेंडेंट आशा शर्मा ने स्टाफ को भविष्य में पूरी जानकारी फाइल में चढ़ाने के निर्देश दिए। इसी दौरान महिला मरीजों को दिए जा रहे डाइट प्लान के बारे में भी टीम ने जानकारी ली। इस पर बताया गया कि महिलाओं को फ्रूटी व बादाम दिए जा रहे हैं। टीम ने गायनी वार्ड में लेबर व अन्य रूम का निरीक्षण किया और ऑपरेशन में प्रयोग होने वाले उपकरणों को भी देखा। टीम द्वारा रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी।
डिलिवरी के दौरान होने वाली मौत के कारण पर चौक गए टीम के सदस्य
टीम के इंचार्ज डाॅ. राजबीर सिंह ने मौजूद डॉक्टर व स्टाफ से अस्पताल में डिलिवरी के दौरान होने वाली मौत के बारे में जानकारी ली। स्टाफ ने दो मौत होने के बारे में बताया। जब जिले की जानकारी ली गई तो बताया गया कि कुल 12 मौत पिछले साल हुई थी। डॉ. राजबीर ने जब मौत का कारण पूछा तो स्टाफ ने बताया कि अधिकतर मामलों में सेप्सिस सामने आया है। सेप्सिस को रक्त विषाक्तता या सिस्टेमिक इन्फलमेटरी रिस्पांस सिंड्रोम कहते हैं। यह एक प्राण घातक स्थिति है जो तब होती है जब किसी संक्रमण के विरुद्ध शरीर की प्रतिक्रिया अपने स्वयं के उतकों और अंगों को क्षति पहुंचाने लगती है।
एचआईवी पॉजिटिव महिलाओं के बच्चों की नहीं मिली रिपोर्ट
टीम के सदस्य एचआईवी सेंटर पहुंचे। यहां पर उन्होंने एचआईवी पीड़ित महिलाओं की डिलिवरी से संबंधित जानकारी ली। स्टाफ ने बताया कि यहां अब तक दो डिलिवरी हो चुकी है लेकिन अब तक उनके बच्चों की रिपोर्ट नहीं मिली है कि वह पॉजिटिव है या नेगेटिव। इस पर डॉ. राजबीर ने बताया कि रेवाड़ी में ऐसे पांच केस थे लेकिन वहां सुरक्षित डिलिवरी करवाई गई और बच्चों की रिपोर्ट भी नेगेटिव आई। स्टाफ ने बताया कि रिपोर्ट आने में एक से डेढ़ माह लग जाता है।
अब सतनाली और कनीना से दो एलएमओ की लगाई सिविल अस्पताल में ड्यूटी
सिविल अस्पताल नारनौल में अब दो लोकल मेडिकल अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सतनाली और कनीना से दो लोकल मेडिकल ऑफिसरों की ड्यूटी सरकारी अस्पताल नारनौल में 13-13 दिन के लिए लगाई गई है। सिविल अस्पताल में लंबे समय से एलएमओ की कमी है। इसी के चलते फील्ड से ड्यूटी लगाई जा रही है। इनकी ड्यूटी गायनी में रहेगी।
गायनी वार्ड चिकित्सक व स्टाफ के साथ की बैठक
मेडिकल सुपरिंटेंडेंट आशा शर्मा ने गायनी वार्ड के चिकित्सक व स्टाफ के साथ बैठक की। बता दें कि सोशल मीडिया पर गर्भवती महिलाओं को रेफर करने के मामले सामने के आने के बाद सिविल अस्पताल प्रशासन हरकत में आ गया है। एमएस ने चिकित्सा अधिकारियों व स्टाफ को किसी प्रकार की लापरवाही नहीं करने के निर्देश दिए हैं। सिविल अस्पताल में केवल दो गायनेकोलॉजिस्ट है। इसमें एक एनएचएम के तहत अनुबंध पर लगाई गई है जबकि दूसरी गायनेकोलॉजिस्ट महेंद्रगढ़ से दो दिन आती हैं।
रेवाड़ी की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया है। उन्होंने जो जानकारी दी है उसको दुरुस्त करवाया जाएगा। सतनाली और कनीना से दो एलएमओ की ड्यूटी लगाई गई है। उनको रोस्टर अनुसार ड्यटी बांदी जाएगी।
-डॉ. आशा शर्मा, एमएस, सिविल अस्पताल, नारनौल।