कार्यालय में खाली पड़ी कुर्सियां
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नारनौल। हरियाणा ज्वाइंट एक्शन कमेटी पावर के आह्वान पर 29 व 30 को 48 घंटे की हड़ताल में पूर्ण रूप से बिजली कर्मचारी भाग लेंगे। यूनिट प्रधान किरोडीमल सैनी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार बिजली कर्मचारियों की मेहनत और एकता की गाढ़ी कमाई से खड़ा किया उद्योग को सरकार अपने चहेते पूंजीपतियों को कोड़ियों के भाव बेचने जा रही है। जिसे बिजली कर्मचारी किसी भी सूरत में ऐसा नहीं होने देंगे। चाहे इसके लिए कोई भी कुर्बानी क्यों ना देनी पड़े। कर्मचारी नेताओं ने बताया कि बिजली देश व प्रदेश के विकास की रीढ़ की हड्डी की तरह है। देश व प्रदेश के उद्योग रेल, संचार प्रणाली से लेकर अनाज की पैदावार तक जीवन में बिजली के महत्व को देखते हुए बिजली सस्ती दरों पर होनी चाहिए। असल में ये सभी पूरे प्रदेश के किसान व जनता से जुड़े हुए मुद्दे हैं। जिस पर बिजली कर्मचारी लड़ रहे हैं। सरकार बिजली कर्मचारियों की बात सुनने के बजाय उत्पीडन की कार्रवाई पर अड़ी हुई है। कर्मचारी नेताओं ने बताया कि वर्ष 1998 के हविपा-भाजपा की सरकार ने सुधारीकरण के नाम पर जनता को चौबीस घंटे बिजली देने व सस्ती दरों पर बिजली देने जैसे वायदे करके बिजली बोर्ड को तोड़कर निगमीकरण किया। तब 400 करोड़ का घाटा अब यह घाटा बढ़कर 38 हजार करोड़ के पार कर गया है। यह सब सरकार की गलत नीतियों का परिणाम है। किरोडीमल सैनी ने बताया कि बिजली बोर्ड के समय प्रदेश में बीस लाख कनेक्शन थे और 55 हजार से ज्यादा स्थायी कर्मचारी कार्य करते थे। अब प्रदेश में 56 लाख कनेक्शनों पर मात्र 25 हजार कर्मचारी कार्यरत है।