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अपनी भूमिका निभाने में बुजुर्ग नहीं छोड़ रहे कोई कमी

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मंडी अटेली। पंचायती चुनावों की नामांकन प्रक्रिया चल रही है। गांवों में उम्मीदवारों ने अपना प्रचार-प्रसार भी बढ़ा दिया है। गांव की सियासत को लेकर बुजुर्ग भी दिन भी दुकानों, चौपालों एवं पेड़ की छावों में हुक्का की गुड़गुड़ाहट के साथ जोड़-तोड़ का गणित बैठा रहे हैं। हुक्का की गुड़गुड़ाहट के चलते नाना प्रकार की चर्चा व विचार साझा किए जा रहे हैं। सरपंच पद प्रत्याशी जिला पार्षद के चुनाव में कोई रुचि नहीं दिखा रहे। वह अपने जीत के समीकरण में जुटे हुए हैं।
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ग्रामीण आंचल में होने वाले पंचायत चुनाव में युवा से लेकर बुजुर्ग अपनी भूमिका निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। बुजुर्गों ने बताया कि पहले बिना पैसे लगाए सरपंच बना दिया करते थे। अब तो पैसे जमकर खर्च करना पड़ता है। पहले भाईचारा और आपसी मेलमिलाप था। इसके कारण काम एक आदमी के कहने से ही बन जाता था। अब समय बदल रहा है। आपाधापी में कोई किसी की सुनवाई नहीं करता। बता दें कि 2 नवंबर को सरपंच और पंच तथा 30 अक्तूबर को पंचायत समिति व जिला पार्षद के लिए मतदान होगा, लेकिन हुक्का चौपाल में समीकरण का जोड़ तोड़ लगातार जारी है। चुनाव की घोषणा से पहले चुनाव की तारीख के इंतजार कर रहे थे। अब मतदान की तिथि पर नजर टिकी हैं। गांव का प्रतिनिधि ऐसे व्यक्ति को देंगे जो सर्व समाज का विकास कराने में सक्षम हो, साथ में यह भी आंकलन किया जा रहा है कि नहीं ऐसे व्यक्ति को वोट देकर जीताना है जो अपनी बात माने।
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गांव का विकास करने में जो व्यक्ति सक्षम हो उसी को गांव का प्रतिनिधि चुना जाए। अपने स्वार्थ में गांव व समाज का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। व्यक्तिगत संबंध एक बात है, लेकिन गांव का विकास सर्व समाज के हित में है।-जितेंद्र तोबडिया, भीलवाड़ा।
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शिक्षित, ईमानदार व साफ छवि के व्यक्ति को गांव का सरपंच बनाना ही कर्त्तव्य है। ताकि गांव का विकास हो सके, क्योंकि अगर किसी गलत व्यक्ति के हाथ में गांव की बागडोर चली गई तो विकास की बात तो दूर अपराध पनपने लगेगा।-बलबीर सिंह, चंदपुरा।
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गांव का सरपंच ऐसे व्यक्ति को चुनना चाहिए जो नशीले पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाए। ताकि गांव की युवा पीढ़ी इस तरह की लत से दूर रहे सके। शारीरिक रूप से स्वस्थ रहकर गांव का नाम रोशन कर सके।-देशराज, नांगल।
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पंचायत प्रतिनिधियों का गांव में विशेष महत्व होता है। जो गांव को विकास की ओर अग्रसर करता है। ऐसे हालात में गांव का प्रतिनिधि ऐसे व्यक्ति को चुनना चाहिए जो चौमुखी विकास कराने के साथ-साथ भाईचारे को भी बरकरार रख सके।-विकास यादव, पृथ्वीपुरा।
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