अटेली के गांव गुजरवास निवासी डॉ. छतर सिंह वर्मा ‘प्रभाकर’ को इंटरनेशनल इंटर्नशिप यूनिवर्सिटी की अनुशंसा पर गोल्डन बुक ऑफ अर्थ ने संसार के 2100 अति प्रेरणादायी लोगों में शुमार किया है। इंटरनेशनल इंटर्नशिप यूनिवर्सिटी की ओर से गोल्डन बुक ऑफ अर्थ का प्रमाण पत्र भी डॉ. वर्मा को प्राप्त हुआ है। डॉ. वर्मा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कांटी में बतौर हिंदी प्राध्यापक सेवारत हैं और पिछले तीन दशकों से शिक्षा व साहित्य के प्रचार प्रसार तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन के प्रति प्रयासरत हैं। 27 साल पहले सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते हुए डॉ. छतर सिंह वर्मा ने एक पत्रकार के रूप में लेखन की शुरुआत की। तत्पश्चात शिक्षा विभाग में पदार्पण हुआ और एक आदर्श शिक्षक के साथ-साथ लोकप्रिय कवि-गीतकार के रूप में अपनी एक खास पहचान बनाई। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए वर्ष 2001 में जहां सुदूर जिला सोनीपत में जिला शिक्षा अधिकारी ने डॉ. वर्मा को प्रशस्ति पत्र भेंटकर सम्मानित किया। वहीं काव्य श्रेष्ठता के कारण हरियाणा साहित्य अकादमी से उनका काव्य-संग्रह ‘दीप जलाना चाहता हूँ’ को सहित्यानुदान द्वारा प्रकाशित हुआ और दीप जलाना चाहता हूँ श्रेष्ठ कृति के लिए सर्वभाषा ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2016 में डॉ. वर्मा को सूर्यकांत त्रिपाठी निराला साहित्य सम्मान से विभूषित किया गया। सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए डॉ. वर्मा वर्ष 2011 में जिला प्रशासन महेंद्रगढ़ द्वारा सम्मानित हुए। वहीं वर्ष 2015 में ओएसडी मुख्यमंत्री के हाथों शान-ए-भारत अवॉर्ड प्राप्त हुआ। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ तथा स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत जैसे राष्ट्रीय अभियानों में सक्रिय योगदान के लिए वर्ष 2017 में तत्कालीन विधानसभा उपाध्यक्ष द्वारा भी डॉ. वर्मा को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड भेंट कर सम्मानित किया। कोरोना महामारी के अंतर्गत कोविड-19 के प्रति जागरूकता पैदा करने तथा जान जोखिम में डालकर पीड़ितों की सहायता करने के लिए डॉ. वर्मा का चयन ‘बेस्ट वालिंटियर’ राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए हुआ है। इसके अतिरिक्त डॉ. वर्मा को सरकारी तथा गैर सरकारी प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा अनेक पुरस्कार एवं मंचीय सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं।