महेंद्रगढ़। नारनौल को अलग जिला बनाने व महेंद्रगढ़ में जिला मुख्यालय की मांग को लेकर सोमवार को विभिन्न संगठनों एवं धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों व अधिवक्ताओं ने सांकेतिक धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
लोगों का कहना है कि प्रदेश सरकार की ओर से महेंद्रगढ़ जिले के साथ भेदभाव किया जा रहा है। प्रदेश के प्राचीन सात जिलों में शामिल होने के बावजूद भी आज तक महेंद्रगढ़ को जिला मुख्यालय नहीं मिला है। इस मांग को लेकर अब संघर्ष जारी रहेगा।
समाजसेवी रामनिवास पाटोदा की अध्यक्षता में विभिन्न संगठनों एवं बार के अधिवक्ताओं के मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम संजीव कुमार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से बताया कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले नए जिले, उपमंडल, पंचायत समिति, तहसील, उप तहसील व पंचायत आदि का पुनर्गठन करने की तैयारियां जोरों पर है, लेकिन महेंद्रगढ़ जिले का कोई नाम नहीं है। क्षेत्र के लोगों ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस कमेटी में सरकार ने कृषि मंत्री कंवरपाल गुर्जर, वित्त मंत्री जयप्रकाश दलाल, पंचायत मंत्री महिपाल ढांडा, नगर निकायमंत्री सुभाष सुधा को शामिल किया गया है। यह कमेटी शीघ्र ही बैठक करेगी। हांसी, गोहाना, डब्बावाली, असंध और मानेसर को जिला बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिसमें महेंद्रगढ़ जिले को उसका हक जिला मुख्यालय तथा नारनौल को अलग जिला बनाए जाने की मांग का कोई जिक्र नजर नहीं है। यह महेंद्रगढ़ क्षेत्र के लोगों के लिए अन्याय होगा।
लोगों का कहना है कि दक्षिणी हरियाणा के दो जिले महेंद्रगढ़ व रेवाड़ी से पांच विधायक भाजपा व दो विधायक कांग्रेस के है उसके बाद भी कमेटी में सातों विधायकों में एक भी विधायक को कमेटी में शामिल नहीं किया गया। धरना देने वालों में छाजूराम, संतलाल अधिवक्ता, इंद्रपाल अधिवक्ता, राधेश्याम शर्मा, सुरेश वर्मा, राजकुमार पूर्व बार प्रधान, अधिवक्ता बंशीलाल, राजेश, संजय, विपिन, राजेश कुमार, अर्जुन, बहादुर, राजेंद्र, बीरसिंह, सुधीर, जयप्रकाश, पोहप सिंह, राजपाल, शमशेर, राकेश आदि मौजूद रहे।
फोटो संख्या:68- लघु सचिवालय महेंद्रगढ़ में जिला मुख्यालय को लेकर धरने पर बैठे सामाजिक संगठन व अ