नारनौल। नगर परिषद नारनौल के रवैये से नाराज पार्षदों का धरना शुक्रवार को पूर्व मंत्री व विधायक के आश्वासन के बाद सात दिन के लिए स्थगित कर दिया है।
शुक्रवार दोपहर साढे तीन बजे पूर्व मंत्री एवं विधायक ओमप्रकाश यादव ने धरने पर बैठे पार्षद के 4 सदस्यों के प्रतिनिधि मंडल को स्थानीय विश्राम गृह पर बुलाया औरउनकी समस्याएं सुनी। इसके बाद नगर आयुक्त व चेयरपर्सन कमलेश सैनी को बुलाकर उनका भी पक्ष सुना गया। तत्पश्चात तीनों पक्षों के मुद्दों पर सुलह करवाते हुए विधायक ने धरना खत्म करने की पार्षद प्रतिनिधि मंडल से की। इसके बाद विधायक, चेयरपर्सन व नगर आयुक्त तीनों धरना स्थल पर आए। वहां विधायक ने सभी पार्षद गण को समझाया और एक सप्ताह का समय मांगा। इस पर एक सप्ताह तक धरना पर नहीं बैठने की बात कही, लेकिन टेंट वहीं छोड़ दिया ताकि एक सप्ताह बाद भी उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो फिर से धरना शुरू किया जा सके। इससे पहले धरने पर बैठे पार्षदों ने नगर परिषद प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरने पर बैठे पार्षदों की दोपहर तक प्रशासन द्वारा सूद नहीं लिए जाने से उनमें भारी रोष व्याप्त था। पार्षदों ने बताया कि चेयरपर्सन व डीएमसी के बीच बहुत से कार्यों में तालमेल नहीं बैठ रहा है। विधायक ओमप्रकाश यादव के सम्मुख सभी बातें आ जाने के बाद उन्होंने दोनों को तालमेल बैठाकर कार्य करने की बात कही।
धरने पर मुख्य रूप से नगर पार्षद नितिन चौधरी, टिंकू सैनी, अजय सिंघल, रविंद्र भांखर, अत्तर सिंह, देवेंद्र, काशीराम सैनी, संजय पटवारी, पार्षद प्रतिनिधि विनोद सैनी, पार्षद प्रतिनिधि धर्मेंद्र भांखर एडवोकेट, पार्षद प्रतिनिधि अरुण यादव एडवोकेट, पार्षद प्रतिनिधि भास्कर खनगवाल व पार्षद प्रतिनिधि अनिल यादव आदि मौजूद रहे।
सात दिन में मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो अधिकारी पर होगी कार्रवाई
विधायक ओमप्रकाश यादव ने पार्षदों से कहा कि अगर सात दिन में आपकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विधायक के आश्वासन पर पार्षदों ने सात दिन के लिए धरना तो स्थगित कर दिया, परंतु नगर परिषद के गेट पर लगे टेंट को नहीं हटवाया। पार्षद नितिन चौधरी ने बताया कि अगर सात दिन के अंदर समाधान नहीं होता है तो इस टेंट के नीचे फिर से पार्षद अपना धरना शुरू कर देगें।
नप प्रशासन ने मांग पूरी नहीं की तो बैठक का भी करेंगे विरोध
पार्षद टिंकू सैनी ने बताया कि 9 जुलाई को हाउस मीटिंग होगी। जब तक नप प्रशासन उनकी मांगों को पूरा नहीं करता है, वह बैठक का पुरजोर विरोध करते हुए उसमें शामिल नहीं होंगे। इसके लिए उन्होंने नप के कार्यकारी अधिकारी को पत्र लिखकर दे दिया है।