महेंद्रगढ़। मासिक शिवरात्रि का पर्व महादेव को समर्पित है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का पर्व बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। श्रावण मास में कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्दशी तिथि को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है, जिसे श्रावण शिवरात्रि बोला जाता है और इसका महत्व महाशिवरात्रि के समान ही बताया गया है।
ज्यतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि इस वर्ष श्रावण शिवरात्रि का पर्व दो अगस्त शुक्रवार को मनाया जाएगा। मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने अमृत मंथन के दौरान निकले हलाहल नामक विष को अपने कंठ में रख लिया था। इसी विष की तपन को शांत करने के लिए इस दिन सभी देवताओं ने उनका जल से अभिषेक किया था। इसलिए भगवान शिव नीलकंठ कहलाए। इसी के कारण सावन शिवरात्रि मनाई जाती है। इसलिए शिव भगत शंकर भगवान को प्रसन्न करने के लिए विशेष कृपा प्राप्ति के कावड़ लाकर जल चढ़ाते है। मान्यता है कि इस दिन शिव पूजन व उनका जलाभिषेक किया जाता हैं। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना व्रत से भक्तों की सभी मनोकामना पूरी होती हैं। शिवरात्रि के व्रत से कई मान्यताएं जुड़ी हुई ऐसा माना जाता है की जो कन्याएं इस व्रत को करती है उन्हें अच्छे वर की प्राप्ति और और महिलाओं का वैवाहिक जीवन सुखमय होता है।
ऐसे करे पूजा
उन्होंने बताया कि इस दिन व्रत करने के साथ ही शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद पंचामृत चढ़ाए। ऊं नमः शिवाय मंत्र का जप करते हुए शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतूरा, आक का पत्ता, फल, पुष्प अर्पित करे। इस दिन ऊं नम शिवाय, शिव चालीसा, शिवजी स्त्रोतों का पाठ करना चाहिए। उन्होंने बताया की अगर आस पास कोई शिव मंदिर न हो तो मिट्टी का पार्थिव शिवलिंग बना कर भी पूजा कर सकते हैं। साबुत चावल पानी से भिगोकर अर्पित करें। इसके अलावा सिंदूर न चढ़ाएं, इसकी जगह भस्म और चंदन से उनका तिलक कर सकते हैं।
इस दिन चार पहर की पूजा का विधान है
श्रावन शिवरात्रि को निशिता काल और चार पहर में भगवान शिव की पूजा अर्चना करने का विधान है। पहले प्रहर में जल से अभिषेक, दूसरे प्रहर में दही से अभिषेक, तीसरे प्रहर में घी से अभिषेक और चौथे प्रहर में शहद से अभिषेक करना ऐसा करने से आपको धन- संपत्ति के प्राप्ति के योग बनेंगे और धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही कुंडली में राहु- केतु के अशुभ प्रभाव से और काल सर्प, चंद्र ग्रहण, विष दोष आदि दोषों से मुक्ति मिलेगी।
पूजा मुहूर्त
प्रथम पहर - 2 अगस्त रात 07:11 बजे से रात 09:49 बजे तक
द्वितीय पहर- 2 अगस्त रात 9:49 बजे से रात 12:27 बजे तक
तृतीय पहर - 2 अगस्त रात 12:27 बजे से 3 अगस्त सुबह 03:06 बजे तक
चतुर्थ पहर - 3 अगस्त सुबह 03:06 बजे से सुबह 05:44 बजे तक
निशिता काल मुहूर्त - 2 अगस्त रात 12:06 बजे से रात 12:49 बजे तक
कावड़ जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त
2 अगस्त को सुबह 5:50 बजे से सुबह 9:35 बजे
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक
शाम 4:02 बजे से रात 7:50 बजे तक रहेगा।