फोटो नंबर- 05कथा में उपस्थित श्रद्धालु। स्रोत-संस्था
नारनौल। मोहल्ला फ्रांसखाना में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सातवें दिन भागवत व्यास पर विराजमान चित्रकूट से आए मोरध्वज शुक्ला ने भक्ति, धर्म और जीवन के रहस्यों को सहज व सरल शैली में प्रस्तुत किया। इस मौके पर महाराज ने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष आदि प्रसंगों का सुंदर वर्णन किया। सुदामा जी जितेंद्रिय एवं भगवान कृष्ण के परम मित्र थे। भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। गरीबी के बावजूद भी हमेशा भगवान के ध्यान में मग्न रहते हैं। पत्नी सुशीला सुदामा जी से बार बार आग्रह करती कि आपके मित्र तो द्वारकाधीश हैं। उनसे जाकर मिलों शायद वह हमारी मदद कर दें। सुदामा पत्नी के कहने पर द्वारका पहुंचते हैं और जब द्वारपाल भगवान कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा नाम का ब्राह्मण आया है। कृष्ण यह सुनकर नंगे पैर दौड़कर आते हैं और अपने मित्र को गले से लगा लेते। संवाद