उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने शुक्रवार को जिले के दो गांवों के किसानों से वीडियो कॉलिंग कर उनकी समस्याओं को जाना व दूर करने पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने गांव उन्हाणी व चिंडालिया के किसानों के अलावा युवाओं से बात करते हुए कोरोना वायरस से बचाव रखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग को पूरी तरह से लागू करने की सलाह दी। पार्टी प्रवक्त के अनुसार गांव चिंडालिया के राजकुमार व उनकी माता पतासी देवी जब अपने खेत में चने की कटाई कर रहे थे, तो अचानक उनके पास उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की वीडियो कॉल आई। पहले तो वे समझे नहीं कि क्या वे असल में ही दुष्यंत चौटाला से ही बात कर रहे हैं, लेकिन जब पतासी देवी से सबसे पहले राम-राम करते हुए पूछा कि वे कहां हैं तो उन्होंने चौटाला को बताया कि वे अपने खेत में चने की कटाई कर रहे हैं। वीडियो कालिंग के दौरान चौटाला ने फसल कटाई व उसकी बिक्री पर समस्याओं के बारे पूछा। पतासी देवी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान मजदूरों की समस्या आ रही है क्योंकि अन्य राज्यों से हर साल आने वाले मजदूर इस बार कोरोना के डर से नहीं आ रहे हैं। शहरों से आने वाले मजदूर भी लॉकडाउन के कारण नहीं आ रहे हैं। इसके चलते वे रात दिन लगकर अपनी सरसों, गेहूं व चने की फसलों की कटाई का काम कर रहे हैं। चौटाला ने उन्हें भरोसा दिलाया कि फसलों का एक-एक दाना सरकार खरीदने के लिए सरकार कृत संकल्प है। उन्होंने अपील की हैं कि वे अपने खेतों में काम करते हुए भी सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें। अपना व अपने समाज को इससे बचाने में मदद करें। इस दौरान उन्होंने इसी गांव के योगेश लांबा से भी वीडियो कॉलिंग से बात की। इसके बाद चौटाला ने गांव उन्हाणी के अभय सिंह धनखड़, बिजेंद्र महलावत, नवीन धनखड़ तथा हरिकेश धनखड़ आदि से भी वीडियो कालिंग कर उनकी समस्याओं को जानने का प्रयास कर उन्हें दूर करने का भरोसा दिलाया। अभय सिंह के पास जब उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की वीडियो कॉल आई तो उसे भी विश्वास नहीं हुआ कि वे दुष्यंत चौटाला से ही बात कर रहे हैं। चौटाला ने उनकी व अन्य किसानों की समस्याओं की जानकारी ली। अभय सिंह ने उनके सामने फसलों को निकालने के काम आने वाली थ्रेसर आदि खराब होने के बाद आ रही समस्या को उठाया। थ्रेसर खराब होने के बाद उसे ठीक करने के लिए लॉकडाउन के कारण मिस्त्री नहीं मिलते। अभय सिंह ने प्रति एकड़ सरसों की कम खरीद पर भी अपनी समस्या उठाई। उन्होंने बताया कि सरसों की पैदावार प्रति एकड़ 10 से 12 क्विंटल होती है। लेकिन, सरकार प्रति एकड़ केवल 8 क्विंटल ही खरीद रही है। शेष सरसों वे औने-पौने दामों में बेचने पर मजबूर हैं। चौटाला ने विश्वास दिलाया कि वे इस पर सरकार से बात कर इस समस्या के समाधान पर विचार करेंगे। यह भी भरोसा दिलाया कि कृषि कार्य में काम आने वाले यंत्रों के कारीगरों व मिस्त्रियों की दुकानों को खोलने पर भी चर्चा करेंगे।