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Mahendragarh: नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार, 25 हजार रुपये बरामद

Sun, 24 Jul 2022 12:25 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़ (हरियाणा)

सार

मुख्य आरोपी कॉल सेंटर चलाता था व सोशल मीडिया पर भर्ती के फर्जी विज्ञापन भेजता था। गांव लावण निवासी कुंदन ने 17 मार्च को शिकायत दी थी। पुलिस ने आरोपियों को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया है।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हरियाणा के महेंद्रगढ़ में निजी विमानन कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को महेंद्रगढ़ की साइबर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद फहीम निवासी नुर्रेमा सराय संभल यूपी, सहबाज अहमद निवासी बुखारा बिजनौर यूपी और ललित निवासी बुद्ध विहार मुरादाबाद यूपी के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया और इस दौरान पूछताछ में आरोपियों से 25 हजार रुपये बरामद किया। आरोपियों को शनिवार को न्यायालय में पेश किया गया।

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पुलिस प्रवक्ता सुमित कुमार ने बताया कि महेंद्रगढ़ क्षेत्र के गांव लावण निवासी कुंदन सिंह ने आनलाइन ठगी की शिकायत थाने में की थी। कुंदन सिंह ने शिकायत में बताया था कि ऑनलाइन नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसके साथ 40 हजार रुपये की ठगी की गई है।

जालसाज खुद को एक निजी विमानन कंपनी का का कर्मचारी बताया था। बताया कि जालसाजों ने उसे ऑनलाइन इंटरव्यू का लिंक भेजा और इंटरव्यू के बाद लेटर भी दिया और अलग-अलग नंबरों से कॉल कर पैसे ट्रांसफर करवा लिए। शिकायत के आधार पर थाना सदर महेंद्रगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज कर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी।
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मामले में कार्रवाई करते हुए साइबर पुलिस ने ठगी की वारदात को अंजाम देने में शामिल एक आरोपी चंदन सिंह को बिनौर, यूपी से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पुलिस ने तीन ओर जालसाजों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने जांच में खुलासा किया है कि गिरोह का मुख्य आरोपी मोहम्मद फहीम है। 

कॉल सेंटर से करता था जालसाजी  
आरोपी मोहम्मद फहीम कॉल सेंटर चलाता था और आमजन को फोन कर नौकरी का झांसा देता था। इसके बाद गिरोह इंटरव्यू का लिंक भेज फर्जी लेटर भी तैयार करता था। पुलिस ने मामले में जांच करते हुए पता लगाया कि जालसाज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी नौकरी के विज्ञापन पोस्ट करते थे। पुलिस को फर्जी पते पर सिम कार्ड और बैंक खाते की सूचना मिली। इसलिए उनका पता लगाना मुश्किल था। पुलिस ने संदिग्धों के बारे में सभी संभावित तकनीकी जानकारी हासिल की है।

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