धौलेड़ा हादसे के बाद अब बायल गांव के लोगों ने क्रशर पर तालाबंदी कर आरपार की लड़ाई का ऐलान किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां कई क्रशर लगे हैं, इनकी डस्ट से उन्हें काफी परेशानी हो रही है। लोगों के बीमार होने के साथ फसल भी खराब हो जाती है।
कई दिनों से क्रशरों के प्रदूषण और हवा के साथ उड़ते डस्ट-मिट्टी से परेशान बायल व रावता की ढाणी के ग्रामीणों ने शुक्रवार शाम एक क्रशर पर ताला जड़ दिया और धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन से मिलीभगत कर यहां बसावट के साथ नियमों को ताक पर रखकर क्रशर लगाए जा रहे हैं।
इससे यहां का वातावरण प्रदूषित होने से बाशिंदे ही नहीं बल्कि फसल उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि वे समस्या से परेशान हो सीएम विंडो पर भी शिकायत दे चुके हैं। यहां समाधान की बजाय उल्टे क्रशर उद्योग को ही बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिले के आला अधिकारी सहित संबंधित विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ही यह संभव हो रहा है।
ग्रामीण श्याम चंदेला, सुमित, लाल सिंह, सुमेर सिंह, संजू चौहान, राजपाल पंच, ईश्वर सिंह, धर्मेंद्र, ओमप्रकाश, विनोद, गोकल, अशोक, विजय आदि का कहना था कि यहां क्रशर संचालकों के हौसले इतने बुलंद है कि उन्होंने कृषि योग्य भूमि पर ही क्रशर लगाना शुरू कर दिया है। दर्जनभर क्रशर पहले से ही कृषि भूमि पर चल रहे हैं। यहां समस्या की ओर अधिकारियों का ध्यान ही नही है।
डस्ट से हो रहे लोग बीमार
ग्रामीणों ने बताया कि यहां दो दर्जन से भी अधिक क्रशर चल रहे है। एक भी क्रशर विभाग के नियमों पर खरा नहीं उतरता। प्रदूषण का बुरा हाल है। क्रशरों से उठने वाले धूल के गुबार से ग्रामीण बीमार होने लगे हैं। ग्रामीण दमा, एलर्जी और टीबी के शिकार बन रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी कोई परवाह ही नही है।
अब होगी आरपार की लड़ाई
प्रशासन की अनदेखी पर आक्रोशित ग्रामीणों ने अब आर-पार के आंदोलन का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन धौलेड़ा क्रशर जोन की घटना दोहराना चाहता है।
यदि यहां ग्रामीणों की बातों पर गौर करे तो यदि प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों की चेतावनी की अनदेखी की तो किसी बड़ी घटना से इंकार नही किया जा सकता है।
कोट्स
तीन क्रशर बायल में अरावली क्षेत्र में चल रहे हैं। हमने उनको नोटिस भी दे रखा है। आगे भी उनका समय नहीं बढ़ाया गया है। इस बारे वे उच्च अधिकारियों को अवगत करवा चुके है। - अभय सिंह, वन अधिकारी नांगल चौधरी