पुलिस ने शनिवार को गांव नीरपुर के बस स्टैंड के पास खड़े लावारिस ट्रक को कब्जे में लेकर गौवंश को मुक्त कराया। ट्रक में गायों और बछड़ों को बेरहमी से मुंह और पैर बांधकर ठूंसा गया था। ठीक से सांस नहीं ले पाने के कारण ट्रक में एक गाय भी मरी पड़ी थी। पशुओं को छिपाने के लिए ट्रक को तिरपाल से ढका गया था। दिन में पकड़े जाने के भय से चालक ट्रक छोड़कर फरार हो चुका था। पुलिस ने स्थानीय लोगाें के सहयोग से गौवंश को मुक्त कर गोपाल गौशाला पहुंचाया। चालक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शनिवार सुबह पुलिस कंट्रोल रूम को नीरपुर चौक से कुछ दूरी पर पशुओं से भरे एक लावारिस ट्रक के खड़े होने की सूचना मिली। सूचना मिलने के बाद एएसआई यशवंत सिंह, मुख्य सिपाही सुनील कुमार और रामस्वरूप सिंह मौके पर पहुंचे। मौके पर पुलिस ने तिरपाल हटाकर देखा तो ट्रक में 10 गाय और नौ बछड़ों को बेरहमी से मुंह और पैर बांधकर ठूंसा गया था। इस कारण पशु आसानी से सांस भी नहीं ले पा रहे थे। पशुओं के बीच एक गाय मरी हुई थी। पुलिस ने स्थानीय लोगों की सहायता से पशुओं को बंधन मुक्त कर उनको गोपाल गौशाला पहुंचाया। ट्रक को कब्जे में लेकर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
बताया जा रहा है कि सभी पशुओं को तस्करी के लिए ले जाया जा रहा था, लेकिन दिन का समय होने और पकड़े जाने के डर से ट्रक चालक अपने वाहन को नीरपुर चौक से कुछ दूरी पर खड़ा कर फरार हो गया।
पहले भी निजामपुर में मिल चुके हैं ऐसे ट्रक
कुछ इस तरह ही पशुओं से भरे ट्रक सर्दियों के मौसम में निजामपुर से भी मिल चुके हैं। इनमें भी गायों को बेरहमी से ठूसा हुआ था। इनमें ट्रक चालक गायों को छोड़कर फरार हो गया था। एक बार करीब 20 और एक बार 10-12 गायों के अलावा बछड़ों को मुक्त कराया गया था।
प्रदेश में पकड़े जाने का होता है भय
हरियाणा में गायों की रक्षा के लिए बनाए कठोर कानूनों के कारण पशु तस्कर प्रदेश की सीमा के अंदर गायों की तस्करी करने से डरते हैं। इस कारण पकड़े जाने के भय से तस्कर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करते ही गायों से भरा ट्रक छोड़कर फरार हो जाते हैं। एक साल में ऐसा तीन बार हो चुका है। तस्कर पकड़े जाने के भय से इसी तरह गौवंश से भरा ट्रक छोड़कर भाग जाते हैं।
राजस्थान से लाते हैं गायों को
प्रदेश में तस्कर गायों को राजस्थान की तरफ से लाते हैं। ये राजस्थान के खेतड़ी, सिंघाना, झुंझुनू, सीकर, नीमकाथाना क्षेत्रों से गायों को मेवात और अन्य स्थानों पर बेचने के लिए लाते हैं। इस कारण नारनौल की तरफ से होकर जाने वाला रास्ता सबसे सुगम पड़ता है।